Women Rights 2025 : Aniruddhacharya के महिलाओं पर बयान से मचा बवाल, प्रियंका चतुर्वेदी ने जताई कड़ी आपत्ति
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(Tehelka Desk)Women Rights 2025 :
धार्मिक प्रवचनकर्ता Aniruddhacharya जी महाराज एक बार फिर अपने विवादित बयान को लेकर विवादों में घिर गए हैं। इस बार उन्होंने महिलाओं को लेकर कथित अपमानजनक टिप्पणी की है, जिस पर राज्यसभा सांसद और शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) की नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।
प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि “इस तरह के बयान महिला विरोधी मानसिकता को दर्शाते हैं। जिन लोगों को समाज मार्गदर्शक मानता है, उनके द्वारा इस तरह की टिप्पणी बेहद शर्मनाक है।”
Women Rights 2025 : क्या कहा था अनिरुद्धाचार्य ने?
एक हालिया धार्मिक प्रवचन के दौरान अनिरुद्धाचार्य ने कथित रूप से कहा:
“स्त्रियों को सज-धज कर नहीं निकलना चाहिए, यह पतन का कारण बनता है।”
“जो महिला खुद को दिखाने की वस्तु बना लेती है, वो धर्म के मार्ग से भटक जाती है।”
उनके इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिस पर व्यापक आलोचना शुरू हो गई।
Women Rights 2025 : प्रियंका चतुर्वेदी का कड़ा प्रतिरोध
प्रियंका चतुर्वेदी ने X (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए कहा “धार्मिक प्रवचन की आड़ में महिलाओं को अपमानित करना नया नहीं है, लेकिन अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यह समाज में महिलाओं के खिलाफ अपराध को बढ़ावा देता है।”
उन्होंने आगे कहा कि “ऐसे बयान देने वालों पर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि समाज में महिला विरोधी मानसिकता को रोका जा सके।”
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Women Rights 2025 : सोशल मीडिया पर मचा हंगामा
अनिरुद्धाचार्य के बयान का वीडियो वायरल होते ही ट्विटर, इंस्टाग्राम और फेसबुक पर लोगों की प्रतिक्रियाएं आने लगीं। कई लोगों ने उनका समर्थन किया, तो कईयों ने इस बयान को “मध्यकालीन सोच” बताया।
कुछ प्रमुख प्रतिक्रियाएं:
- @feministindia: “धर्म के नाम पर महिलाओं को टारगेट करना बंद करो।”
- @truthseeker: “हम 21वीं सदी में हैं, महिलाओं की स्वतंत्रता पर प्रवचन नहीं चलेगा।”
- @dharmikshakti: “अनिरुद्धाचार्य ने जो कहा वो शास्त्रों के अनुसार है, इसमें गलत क्या है?”
Women Rights 2025 : क्या हो सकती है कानूनी कार्रवाई?
भारत का संविधान और कानून महिलाओं को समान अधिकार देता है। किसी भी तरह की सार्वजनिक टिप्पणी जो महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाए, भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 509 के अंतर्गत अपराध मानी जाती है।
यदि अनिरुद्धाचार्य का बयान महिला विरोधी और भड़काऊ पाया जाता है, तो:
- IPC की धारा 295A (धार्मिक भावना को ठेस पहुंचाना)
- IPC 509 (महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाली बात कहना)
- IT एक्ट की धारा 67 (आपत्तिजनक सामग्री का प्रसार)
इनके तहत मामला दर्ज हो सकता है।
Women Rights 2025 : धार्मिक नेताओं की सामाजिक ज़िम्मेदारी
धार्मिक नेताओं को समाज में एक आदर्श के रूप में देखा जाता है। उनके शब्दों का सीधा प्रभाव जनता पर पड़ता है। ऐसे में जब कोई धार्मिक प्रवचनकर्ता महिलाओं को “दिखाने की वस्तु” या “पतन की वजह” कहता है, तो यह:
- महिलाओं की स्वतंत्रता पर हमला है
- लैंगिक असमानता को बढ़ावा देता है
- युवा पीढ़ी में गलत सोच पैदा करता है
अनिरुद्धाचार्य द्वारा दिए गए बयान पर विपक्षी नेता प्रियंका चतुर्वेदी की कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई है। उनका कहना है कि “ऐसे बयान समाज में विष घोलते हैं और महिलाओं के खिलाफ सोच को बढ़ावा देते हैं।”
बयान के पीछे धार्मिक दृष्टिकोण हो सकता है, लेकिन आज के आधुनिक, संवैधानिक और समतावादी भारत में इस तरह की महिला-विरोधी बातें अस्वीकार्य हैं।
Women Rights 2025 : सरकार और धर्माचार्यों से सवाल
- क्या धार्मिक मंचों का उपयोग समाज को जोड़ने की बजाय बांटने में किया जा रहा है?
- क्या महिलाओं के सम्मान की रक्षा के लिए अब धार्मिक संस्थाओं में आचार संहिता लागू होनी चाहिए?
- क्या ऐसे वक्तव्यों पर स्वत: संज्ञान लेकर कार्रवाई होनी चाहिए?


