Yellow Fever 2025 : मानसून में क्यों बढ़ जाता है येलो फीवर का खतरा, जानिए इसके लक्षण
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- 1.0.1 Yellow Fever 2025 : येलो फीवर के लक्षण क्या हैं?
- 1.0.2 Yellow Fever 2025 : कैसे पता चले कि येलो फीवर ही है?
- 1.0.3 Yellow Fever 2025 : इलाज क्या है?
- 1.0.4 Yellow Fever 2025 : येलो फीवर से बचाव कैसे करें?
- 1.0.5 Yellow Fever 2025 : भारत में क्या है स्थिति?
- 1.0.6 Yellow Fever 2025 : कब डॉक्टर से मिलना चाहिए?
(Tehelka Desk)Yellow Fever 2025 :
बारिश के मौसम में जब मौसम खुशनुमा होता है, हरियाली बढ़ती है और तापमान थोड़ा ठंडा होता है, तब एक तरफ लोग मानसून का मजा लेते हैं तो दूसरी तरफ कई बीमारियां भी दस्तक देने लगती हैं। इन्हीं में से एक गंभीर बीमारी है Yellow fever ।
हालांकि भारत में येलो फीवर के केस बहुत ज्यादा नहीं होते, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य मानक इसे लेकर बहुत सतर्क रहते हैं। खासकर मानसून के दौरान मच्छरों की संख्या बढ़ने से येलो फीवर का रिस्क ज्यादा हो जाता है। इसलिए जरूरी है कि लोग इसके लक्षणों, कारणों और बचाव के तरीकों को समझें।
Yellow Fever 2025 : क्या है येलो फीवर?
येलो फीवर एक वायरल बीमारी है, जो एडीज एजिप्टी प्रजाति के मच्छरों के काटने से फैलती है। इस वायरस का नाम येलो फीवर इसलिए पड़ा क्योंकि इस बीमारी में मरीज के शरीर में पीलिया जैसे लक्षण उभर आते हैं और त्वचा पीली पड़ने लगती है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक येलो फीवर अफ्रीका और साउथ अमेरिका के कुछ हिस्सों में अधिकतर पाया जाता है, लेकिन दुनिया के किसी भी हिस्से में संक्रमित व्यक्ति के संपर्क या संक्रमित मच्छर के कारण इसके फैलने की आशंका रहती है।
Yellow Fever 2025 : कैसे फैलता है येलो फीवर?
- येलो फीवर का वायरस मच्छरों के जरिए इंसानों में पहुंचता है।
- जब कोई मच्छर किसी संक्रमित व्यक्ति या बंदर को काटता है तो वायरस उसके शरीर में चला जाता है।
- वही मच्छर अगर किसी दूसरे स्वस्थ व्यक्ति को काट लेता है तो वायरस उसके शरीर में पहुंच जाता है।
- यह बीमारी इंसान से इंसान को सीधे नहीं फैलती, इसका मुख्य माध्यम संक्रमित मच्छर ही हैं।
Yellow Fever 2025 : क्यों बढ़ता है खतरा मानसून में?
मानसून में बारिश और नमी के कारण जगह-जगह पानी जमा हो जाता है, जिससे मच्छरों के प्रजनन के लिए अनुकूल माहौल बन जाता है। एडीज एजिप्टी मच्छर ठहरे हुए साफ पानी में तेजी से पनपते हैं। यही वजह है कि डेंगू और चिकनगुनिया के साथ-साथ येलो फीवर जैसी बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है।
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Yellow Fever 2025 : येलो फीवर के लक्षण क्या हैं?
येलो फीवर के लक्षण शुरुआत में सामान्य बुखार की तरह ही नजर आते हैं, इसलिए लोग अक्सर इसे मामूली वायरल या फ्लू समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन यह लापरवाही गंभीर पड़ सकती है।
इसके लक्षण आमतौर पर दो चरणों में दिखते हैं:
प्रारंभिक लक्षण:
- अचानक तेज बुखार
- सिर दर्द
- मांसपेशियों और पीठ में दर्द
- ठंड लगना
- भूख कम लगना
- उल्टी या जी मिचलाना
गंभीर लक्षण:
कई बार 24 घंटे बाद बीमारी का दूसरा चरण शुरू होता है जिसमें गंभीर लक्षण दिखने लगते हैं:
- त्वचा और आंखों में पीलापन (जॉन्डिस)
- पेट दर्द और उल्टी
- नाक, मुंह या आंखों से खून आना
- लीवर और किडनी फेल होने का खतरा
- शरीर में अंदरूनी रक्तस्राव
Yellow Fever 2025 : कैसे पता चले कि येलो फीवर ही है?
येलो फीवर का कन्फर्म डायग्नोसिस ब्लड टेस्ट से ही होता है। एंटीबॉडी टेस्ट, PCR टेस्ट और लीवर फंक्शन टेस्ट इसके लिए किए जाते हैं। अगर डॉक्टर को येलो फीवर का शक होता है तो वह तुरंत सैंपल लेकर जांच की सलाह देते हैं।
Yellow Fever 2025 : इलाज क्या है?
येलो फीवर का कोई स्पेसिफिक इलाज नहीं है। इस बीमारी में लक्षणों के आधार पर ही मरीज को राहत दी जाती है। मसलन बुखार को कंट्रोल करना, शरीर में पानी की कमी को पूरा करना, ऑर्गन फेलियर से बचाना और संक्रमण को रोकना ही मुख्य उपचार होता है।
गंभीर मामलों में मरीज को ICU में भर्ती करना पड़ सकता है।
Yellow Fever 2025 : येलो फीवर से बचाव कैसे करें?
क्योंंकि इसका इलाज सीमित है, इसलिए बचाव ही सबसे अच्छा तरीका है। WHO के अनुसार येलो फीवर से बचने के लिए वैक्सीनेशन सबसे असरदार तरीका है। कई देशों में विदेश यात्रा पर जाने वालों को येलो फीवर वैक्सीन सर्टिफिकेट दिखाना जरूरी होता है।
भारत में अभी येलो फीवर के टीके सीमित लोगों को ही लगाए जाते हैं खासकर उन लोगों को जो अफ्रीका या साउथ अमेरिका जैसे प्रभावित क्षेत्रों में जाने वाले हैं।
घरेलू बचाव के तरीके:
- घर के आसपास पानी जमा न होने दें।
- कूलर, टंकी, गमलों में पानी न ठहरने दें।
- सोते वक्त मच्छरदानी का इस्तेमाल करें।
- पूरी बांह के कपड़े पहनें।
- मच्छर भगाने वाली क्रीम या रिपेलेंट का इस्तेमाल करें।
- घर में खिड़कियों पर जाली लगवाएं।
Yellow Fever 2025 : भारत में क्या है स्थिति?
भारत में येलो फीवर के स्थानीय संक्रमण की रिपोर्ट अभी तक नहीं है, लेकिन एडीज एजिप्टी मच्छर डेंगू और चिकनगुनिया पहले से फैला रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ते अंतरराष्ट्रीय संपर्क और जलवायु परिवर्तन के चलते येलो फीवर जैसे रोगों का जोखिम भी बढ़ सकता है।
Yellow Fever 2025 : कब डॉक्टर से मिलना चाहिए?
अगर मानसून में तेज बुखार के साथ पीलिया के लक्षण दिखें या शरीर में ब्लीडिंग हो तो तुरंत डॉक्टर से मिलें। किसी भी हालत में सेल्फ मेडिकेशन न करें।
येलो फीवर भले ही भारत में आम बीमारी न हो, लेकिन मानसून के मौसम में मच्छरों से जुड़ी कोई भी बीमारी नजरअंदाज नहीं करनी चाहिए। सावधानी और साफ-सफाई ही इसका सबसे बड़ा इलाज है। जागरूक रहें, सुरक्षित रहें।


