Uttrakhand Cloudburst : चारधाम यात्रा पर लगा ब्रेक, उत्तरकाशी में फटा बादल
(Tehelka Desk)Uttrakhand Cloudburst :
हादसे की जगह और समय
उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में स्थित सिलाई बैंड के पास 29 जून 2025 की सुबह एक भयानक प्राकृतिक आपदा ने दस्तक दी। यमुनोत्री हाईवे पर बलीगढ़ क्षेत्र में अचानक बादल फटने (Cloudburst) की घटना घटी, जिससे पूरे इलाके में भूस्खलन, मलबा और तेज़ जलधारा बहने लगी।
यह हादसा उस समय हुआ जब हाईवे पर मजदूर एक होटल निर्माण स्थल पर काम कर रहे थे।
कई मजदूर लापता, कुछ बह गए
बादल फटने के तुरंत बाद, तेज बहाव और भारी मलबे में कम से कम 8 से 9 मजदूर लापता हो गए। इन मजदूरों की पहचान अभी तक पूरी तरह से नहीं हो पाई है, लेकिन प्रशासन के अनुसार वे बिहार, झारखंड और उत्तराखंड के मूल निवासी बताए जा रहे हैं।
कुछ प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि पानी का बहाव इतना तेज था कि मजदूरों को संभलने का मौका भी नहीं मिला और वे मलबे के साथ बह गए।
यमुनोत्री हाईवे पूरी तरह बंद
बादल फटने से यमुनोत्री हाईवे के कई हिस्सों पर भारी मलबा और चट्टानें आ गिरीं, जिससे रास्ता पूरी तरह से बाधित हो गया।
यह रास्ता चारधाम यात्रा के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है, और घटना के बाद स्थानीय प्रशासन ने यात्रियों से अपील की कि वे अगले आदेश तक यात्रा स्थगित रखें।
वर्तमान में हाईवे को साफ करने के लिए BRO (Border Roads Organisation) की टीम सक्रिय है।
बचाव कार्य में जुटा प्रशासन
घटना की सूचना मिलते ही राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF), राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF), स्थानीय पुलिस और जिला प्रशासन मौके पर पहुंच गए।
बचाव कार्य भारी बारिश और दुर्गम इलाकों के कारण अत्यंत चुनौतीपूर्ण रहा।
बचाव टीमों ने ड्रोन, स्निफर डॉग्स और अन्य आधुनिक तकनीकों की मदद से लापता मजदूरों की तलाश शुरू की है।
अब तक किसी शव या सुरक्षित मजदूर का पता नहीं चल सका है।
यमुना नदी में जलस्तर बढ़ा
बादल फटने के बाद यमुना नदी में अचानक जलस्तर बढ़ गया, जिससे कई छोटे गांवों और बस्तियों में बाढ़ जैसी स्थिति बन गई है।
स्याना चट्टी और जानकीचट्टी जैसे तीर्थ क्षेत्रों में लोगों में दहशत फैल गई।
प्रशासन ने इन क्षेत्रों में रहने वालों को सतर्क रहने और सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी है।
Shefali Jariwala Death: दुल्हन की तरह सजाई गई ‘कांटा लगा’ गर्ल की अंतिम यात्रा
चारधाम यात्रा पर रोक
हजारों की संख्या में श्रद्धालु रास्ते में फंसे हुए हैं और प्रशासन उन्हें स्थानीय विद्यालयों, धर्मशालाओं और पंचायत भवनों में ठहराने की व्यवस्था कर रहा है।
खाद्य सामग्री और पानी की आपूर्ति भी तेजी से की जा रही है।
मौसम विभाग का अलर्ट
भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने उत्तराखंड के लिए ‘रेड अलर्ट’ जारी किया है। 29 जून से 1 जुलाई तक टिहरी, पौड़ी, चमोली, उत्तरकाशी, पिथौरागढ़, बागेश्वर और देहरादून जिलों में भारी से अति भारी बारिश की संभावना जताई गई है।
मौसम विभाग ने विशेषकर पर्वतीय क्षेत्रों में रहने वालों को सावधानी बरतने और बिना ज़रूरत घर से बाहर न निकलने की चेतावनी दी है।
मजदूरों के परिवारों में कोहराम
लापता मजदूरों के परिवारों को जैसे ही इस घटना की जानकारी मिली, वे अस्पतालों और घटनास्थल की ओर दौड़ पड़े। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। एक मजदूर की पत्नी ने बताया, “सुबह आखिरी बार बात हुई थी, उन्होंने कहा था कि बारिश हो रही है, लेकिन सब ठीक है। अब कुछ पता नहीं।”
मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस हादसे पर गहरा दुख जताया है और प्रशासन को त्वरित राहत एवं बचाव कार्य के निर्देश दिए हैं।
उन्होंने ट्वीट कर कहा:
“उत्तरकाशी में बादल फटने की खबर अत्यंत दुखद है। राहत और बचाव कार्य युद्धस्तर पर जारी है। हम लापता मजदूरों को सुरक्षित खोजने के लिए हरसंभव प्रयास कर रहे हैं।”
BRO और स्थानीय ग्रामीणों की मदद
बचाव कार्य में BRO (Border Roads Organisation) ने भी बड़ा योगदान दिया है। सड़कों से मलबा हटाने और वैकल्पिक रास्ते बनाने के लिए मशीनरी मंगाई गई है। वहीं, स्थानीय ग्रामीणों ने भी पानी, चाय और प्राथमिक चिकित्सा की व्यवस्था कर राहत टीमों और फंसे यात्रियों की सहायता की।
भविष्य की चुनौती
उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्यों में मॉनसून के दौरान बादल फटना, भू-स्खलन और मलबा बहाव आम समस्या बनती जा रही है।
वर्ष 2023 और 2024 में भी कई स्थानों पर इसी तरह की घटनाएँ हुई थीं।
सरकार को चाहिए कि वो स्थायी समाधान, जैसे–
- जल निकासी की बेहतर व्यवस्था
- भूस्खलन रोधी संरचनाएँ
- मौसम पूर्वानुमान की रियल टाइम सूचना प्रणाली
– लागू करे ताकि ऐसी आपदाओं से होने वाले नुकसान को कम किया जा सके।
एक और चेतावनी देने वाली घटना
सिलाई बैंड पर बादल फटने की घटना ने एक बार फिर यह दिखा दिया है कि प्रकृति के आगे मनुष्य की तैयारी बहुत सीमित है।
हालांकि प्रशासन और बचाव दल मुस्तैद हैं, लेकिन लापता मजदूरों की सलामती की उम्मीद में हर किसी की नज़रें टिकी हैं।


