Uttarakhand Land Subsidence 2025 : ग्लेशियर के मलबे पर बसा है जोशीमठ शहर
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- 0.0.1 Uttarakhand Land Subsidence 2025 : ग्लेशियर के मलबे पर बसा है जोशीमठ शहर
- 0.0.2 Uttarakhand Land Subsidence 2025 : 2022–23 में स्थिति हो गई अचानक गंभीर
- 0.0.3 Uttarakhand Land Subsidence 2025 : दशकों पुरानी रिपोर्टें बनीं आधार
- 0.0.4 Uttarakhand Land Subsidence 2025 : वैज्ञानिकों की वर्तमान पड़ताल और भूगर्भीय कारणों की जांच
- 0.0.5 Uttarakhand Land Subsidence 2025 : भू-तंत्र की अस्थिरता, पहाड़ी परतों में पहले से मौजूद
- 1 Vote Chor Gaddi Chhod Rally 2025 : दिल्ली महारैली के लिए उत्तराखंड में कांग्रेस की तैयारियाँ तेज…
(Tehelka Desk) Uttarakhand Land Subsidence 2025 :
Uttarakhand Land Subsidence 2025 : ग्लेशियर के मलबे पर बसा है जोशीमठ शहर
UTTARAKHAND के जोशीमठ में भू-धंसाव को लेकर वैज्ञानिक संस्थानों की टीम लंबे समय से अध्ययन कर रही है। हालांकि भू-धंसाव की आशंका कोई नई बात नहीं है-विशेषज्ञ पिछले दो से तीन दशकों से इस क्षेत्र के अस्थिर भू-भाग को लेकर चेतावनी देते आए हैं,वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान के साथ ही अन्य संस्थाओं के वैज्ञानिकों की ओर से उस क्षेत्र में अध्ययन किया गया.जिसमें पाया गया कि भू-धंसाव अलग-अलग जगह पर कुछ सेंटीमीटर से लेकर 14.5 मीटर तक है.. इसके साथ ही इस बात पर भी जोर दिया गया कि जोशीमठ शहर पुराने भूस्खलन के मलबे के ऊपर बसा है.
Uttarakhand Land Subsidence 2025 : 2022–23 में स्थिति हो गई अचानक गंभीर
लेकिन साल 2022–23 में स्थिति अचानक गंभीर हो गई, जब शहर के कई हिस्सों में जमीन धंसने, भवनों में दरारें आने और ध्वस्त होने के मामले तेजी से सामने आए। इस घटना ने न केवल प्रशासन, बल्कि भू-विज्ञान से जुड़े राष्ट्रीय संस्थानों को भी सतर्क कर दिया। डॉ. मनीष मेहता ने कहा कि फील्ड वर्क होने के बाद पूरी जानकारी सामने आ पाएगी कि उसे क्षेत्र की एक्चुअल स्थिति पहले क्या थी. साथ ही कहा कि डेटिंग से 7000 साल पुरानी जानकारियां मिली हैं. ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि उस दौरान वहां कोई बसावट नहीं रही होगी. अगर उसे दौरान कोई बसावट रही भी होगी तो उस रास्ते से लोग बदरीनाथ धाम के दर्शन करने जाते रहे होंगे. साथ ही बताया कि करीब 7000 साल पहले यह पूरा क्षेत्र ग्लेशियर से ढका था |
Uttarakhand Land Subsidence 2025 : दशकों पुरानी रिपोर्टें बनीं आधार
1980 के दशक में बनी मिश्रा कमेटी रिपोर्ट और उसके बाद कई वैज्ञानिक अध्ययनों में जोशीमठ को अत्यधिक संवेदनशील क्षेत्र बताया गया था। रिपोर्टों ने साफ लिखा था कि यह क्षेत्र पुराने भूस्खलन मलबे पर बसा है,जमीन की वहन क्षमता सीमित है अत्यधिक निर्माण और अनियंत्रित विकास जोखिम बढ़ा सकता है। इन चेतावनियों के बावजूद शहर का विस्तार तेजी से बढ़ता गया, जिससे भू-धंसाव का खतरा और गहरा होता गया।
Uttarakhand Land Subsidence 2025 : वैज्ञानिकों की वर्तमान पड़ताल और भूगर्भीय कारणों की जांच
2022–23 के बाद वैज्ञानिक टीमों ने कई महत्वपूर्ण कारकों का अध्ययन शुरू किया।सब्सिडेंस सैटेलाइट डेटा और ग्राउंड सर्वे से पता चला कि कई क्षेत्रों में जमीन धीरे-धीरे नीचे जा रही थी। भूगर्भीय जल प्रवाह: पानी के प्राकृतिक प्रवाह में बाधा और रिसाव ने मिट्टी की मजबूती कम की।
Uttarakhand Land Subsidence 2025 : भू-तंत्र की अस्थिरता, पहाड़ी परतों में पहले से मौजूद
सड़क, भवन और सुरंग परियोजनाओं से भूमि पर अतिरिक्त दबाव पड़ा।भू-तंत्र की अस्थिरता: पहाड़ी की परतों में पहले से मौजूद कमजोरी समय के साथ सक्रिय हो गई। ISRO, Wadia Institute of Himalayan Geology, IITs और अन्य संस्थान लगातार माप, सर्वे और भूवैज्ञानिक रिकॉर्ड का विश्लेषण कर रहे हैं।
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Uttarakhand Land Subsidence 2025 : 2022–23 में संकट क्यों बढ़ा?
नवंबर 2022 से जनवरी 2023 के बीच दरारों की संख्या और जमीन बैठने की गति अचानक बढ़ने लगी। कई घरों को खाली करवाना पड़ा, सड़कें फट गईं और पानी के स्रोत प्रभावित हुए। विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार निर्माण, जल प्रवाह में बदलाव, प्राकृतिक ढलान पर दबाव, और जलवायु परिवर्तन के प्रभाव इकठ्ठे होकर इस संकट को तेज करने का कारण बने। भविष्य के लिए सुझाए गए उपाय
Uttarakhand Land Subsidence 2025 : विशेषज्ञों ने जोशीमठ के लिए कई कदम सुझाए
जोखिम वाले क्षेत्रों में निर्माण पूरी तरह रोका जाए, पुराने भूस्खलन मलबे वाले हिस्सों के लिए विस्तृत माइक्रो-ज़ोनिंग की जाए जलनिकासी प्रणाली को दुरुस्त किया जाए ,सुरक्षित क्षेत्रों में वैकल्पिक आवास और आबादी का चरणबद्ध पुनर्वास किया जाए, वैज्ञानिक मॉनिटरिंग को स्थायी रूप से लागू किया जाए


