Tarrif : भारत पर 500 फीसदी टैरिफ का खतरा, तेल खरीद पर बढ़ सकती हैं मुश्किलें

US Tarrif Incesaes : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाने वाले एक नए विधेयक को अपना समर्थन दे दिया है, जिसका सीधा असर भारत सहित कई देशों पर पड़ सकता है। यह विधेयक मुख्य रूप से उन देशों को निशाना बनाने के लिए तैयार किया गया है जो रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीद रहे हैं। रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने स्पष्ट किया कि यह कदम रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच रूस की आर्थिक शक्ति को कमजोर करने के उद्देश्य से उठाया जा रहा है, लेकिन इसकी कीमत भारत को भी चुकानी पड़ सकती है।
सीनेटर ग्राहम के अनुसार, यह विधेयक राष्ट्रपति ट्रंप को उन देशों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का अधिकार प्रदान करेगा जो सस्ते रूसी तेल की खरीद के माध्यम से रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की युद्ध मशीनरी को वित्तीय सहायता पहुंचा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यूक्रेन शांति के लिए रियायतें देने को तैयार है, जबकि पुतिन केवल बयानबाजी में लगे हैं और निर्दोष लोगों की हत्या जारी रखे हुए हैं। इस विधेयक के जरिए चीन, भारत और ब्राजील जैसे प्रमुख देशों पर दबाव बनाया जा सकेगा ताकि वे रूसी तेल की खरीद बंद करें।
भारत के लिए यह स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक है क्योंकि देश पहले से ही अमेरिका द्वारा लगाए गए 50 फीसदी टैरिफ का बोझ झेल रहा है। भारत उन देशों में शामिल है जिन पर अमेरिका ने सबसे अधिक आयात शुल्क लगाया है। अब यदि यह नया विधेयक पारित होता है और लागू किया जाता है, तो भारत पर 500 फीसदी तक का भारी Tarrif लगाया जा सकता है। यह भारत की अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती साबित हो सकता है, खासकर ऐसे समय में जब देश ऊर्जा सुरक्षा और किफायती तेल आपूर्ति पर निर्भर है।
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भारत रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल आयात करता है, जो घरेलू ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने और मुद्रास्फीति को नियंत्रित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद से भारत ने रूसी तेल की खरीद में उल्लेखनीय वृद्धि की है, जिससे ऊर्जा लागत में कमी आई है। लेकिन अमेरिका के इस नए विधेयक से भारत की विदेश नीति और आर्थिक हितों के बीच संतुलन बनाना और भी जटिल हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह विधेयक कानून बन जाता है, तो भारत को अपनी ऊर्जा आपूर्ति रणनीति पर पुनर्विचार करना पड़ सकता है और वैकल्पिक स्रोतों की तलाश करनी होगी।



