Somnath Temple : गजनवी हमले के1000 साल, जानिए ऐतिहासिक तथ्य

Somnath Temple गुजरात: महमूद गजनवी द्वारा सोमनाथ मंदिर पर हमले के 1000 साल पूरे हो रहे हैं। रविवार को ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शामिल हुए। प्रसिद्ध इतिहासकार प्रो. डॉ. वैभव म्हस्के ने ईटीवी भारत से बातचीत में इस ऐतिहासिक घटना पर विस्तृत जानकारी दी।
सोमनाथ मंदिर का इतिहास
डॉ. म्हस्के ने बताया कि सौराष्ट्र में स्थित Somnath Temple चालुक्य काल में बना था और इसका उल्लेख महाभारत में भी मिलता है। यह मंदिर भारतीयों के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र रहा है। इतिहास में इस मंदिर को बार-बार लूटा गया और पुनर्निर्मित किया गया।
971 ईस्वी में जन्मे महमूद गजनवी ने 1000 से 1030 ईसवी तक शासन किया। वह गजनी शहर का सुल्तान था और सुल्तान की उपाधि धारण करने वाला पहला मुस्लिम शासक माना जाता है।
डॉ. म्हस्के के अनुसार, गजनवी बेहद क्रूर था। 1000 ईसवी में सत्ता हथियाने के लिए उसने अपने भाइयों और रिश्तेदारों को मार डाला और स्वयं को सुल्तान घोषित किया। इसके बाद उसका ध्यान भारत की दौलत पर गया और उसने भारत पर कुल 17 हमले किए।
गजनवी के हमलों को रोकने के लिए वर्तमान पाकिस्तान के ओहिंद प्रांत में राजपूत वंश के राजा जयपाल ने उसका सामना किया। जयपाल स्वयं गजनी प्रांत पहुंचे और अपनी सेना से कहा कि असफल होने पर वे आत्महत्या कर लेंगे।
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(Somnath Temple)गजनवी को हराने में नाकाम रहने पर जयपाल ने अपने 11 वर्षीय पुत्र आनंदपाल को राजा घोषित कर आत्महत्या कर ली। 12 साल की उम्र में सत्ता संभालने के बाद भी आनंदपाल गजनवी को रोकने में असफल रहे। उनके बाद उनके पुत्र त्रिलोचनपाल भी गजनवी को नहीं रोक सके।
इतिहासकार ने स्पष्ट किया कि महमूद गजनवी ने भारत पर केवल लूटपाट के लिए हमले किए। Somnath Temple से लूटे गए विशाल धन का उपयोग उसने अपने समय में गजनी शहर के विकास के लिए किया। भारत को आजादी मिलने के बाद देश के प्रथम गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल की पहल पर 1951 में सोमनाथ मंदिर का जीर्णोद्धार कराया गया, जो भारतीय स्वाभिमान और आस्था का प्रतीक बन गया।




