PSLV-C62 Mission Launch : ISRO के PSLV-C62 मिशन में तकनीकी खराबी, जांच शुरू

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PSLV-C62 Mission Launch श्रीहरिकोटा : भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने आज सोमवार सुबह अपने PSLV-C62 रॉकेट से Anvesha (EOS-N1) पृथ्वी अवलोकन उपग्रह का प्रक्षेपण किया, लेकिन मिशन के तीसरे चरण (PS3 स्टेज) में तकनीकी समस्या आ गई। ISRO ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि इस खराबी की गहन जांच शुरू कर दी गई है।
वर्ष 2026 का पहला प्रक्षेपण
यह साल 2026 में इसरो का पहला उपग्रह प्रक्षेपण था। पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (PSLV) की 64वीं उड़ान सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र, श्रीहरिकोटा के फर्स्ट लॉन्च पैड से सुबह 10:17 बजे भारतीय समयानुसार उड़ान भरी। ISRO ने X पर पोस्ट करते हुए कहा, “लिफ्टऑफ! PSLV-C62 ने SDSC-SHAR, श्रीहरिकोटा से EOS-N1 मिशन लॉन्च किया।”
Anvesha नाम से जाने जाने वाले EOS-N1 उपग्रह का मुख्य उद्देश्य कृषि, शहरी नक्शा निर्माण और पर्यावरण निगरानी के क्षेत्र में देश की रिमोट सेंसिंग क्षमताओं को मजबूत करना है। इस मिशन में 15 सह-यात्री उपग्रह भी शामिल हैं, जिन्हें सूर्य-तुल्यकालिक कक्षा में स्थापित करने की योजना बनाई गई थी।
इस लॉन्च में एक खास बात यह रही कि इसमें स्पेनिश स्टार्टअप का KID (केस्ट्रेल इनिशियल टेक्नोलॉजी डेमोंस्ट्रेटर) भी शामिल था। यह री-एंट्री व्हीकल का एक छोटा प्रोटोटाइप है, जिसे अंतिम सह-यात्री के रूप में स्थापित किया जाना था। योजना के अनुसार, KID कैप्सूल को पृथ्वी के वायुमंडल में पुनः प्रवेश करके दक्षिण प्रशांत महासागर में उतरना था।
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न्यूस्पेस इंडिया का नौवां व्यावसायिक मिशन
PSLV-C62 / EOS-N1 मिशन, ISRO की व्यावसायिक शाखा न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL) द्वारा संचालित नौवां समर्पित व्यावसायिक मिशन था। यह PSLV-DL संस्करण का उपयोग करने वाला पांचवां प्रक्षेपण था, जिसमें दो सॉलिड स्ट्रैप-ऑन मोटर लगे हुए थे।
PSLV ने अब तक 63 सफल उड़ानें पूरी की हैं, जिनमें चंद्रयान-1, मंगल ऑर्बिटर मिशन, आदित्य-L1 और एस्ट्रोसैट जैसे महत्वपूर्ण मिशन शामिल हैं। वर्ष 2017 में PSLV ने एक साथ 104 उपग्रह लॉन्च करके विश्व रिकॉर्ड बनाया था।
उल्लेखनीय है कि मई में PSLV-C61 मिशन के दौरान भी, जो ISRO का 101वां प्रक्षेपण था, तीसरे चरण में तकनीकी खराबी आई थी। उस मिशन में 1,696 किलोग्राम के EOS-09 उपग्रह को 505 किलोमीटर की सूर्य-तुल्यकालिक ध्रुवीय कक्षा में स्थापित किया जाना था। प्रारंभिक चरण सामान्य रहे थे, लेकिन रॉकेट के तीसरे चरण में आई तकनीकी दिक्कत के कारण मिशन निर्धारित कक्षा तक नहीं पहुंच पाया था।



