Premananda Maharaj : भगवान हमें गलत काम करने से क्यों नहीं रोकते? — प्रेमानंद महाराज के उत्तर ने भक्तों को दिया गहरा जीवन-संदेश

Premananda Maharaj : आज के समय में जब व्यक्ति दुख, अन्याय और सामाजिक बुराइयों पर घिरता है, तब उसके मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि यदि भगवान सब कुछ देख रहे हैं और हम उनके अंश हैं, तो वे हमें गलत रास्ते पर जाने से रोकते क्यों नहीं। इसी विषय पर हाल ही में अध्यात्म की अदृश्य जगाने वाले संत प्रेमानंद महाराज से एक भक्त ने प्रश्न किया, जिसका उत्तर चर्चा का विषय बना हुआ है।
भक्त ने अपनी जिज्ञासा रखते हुए कहा कि जब हम परमात्मा के अंश हैं, तो फिर वे हमें गलत कर्म करने की शक्ति क्यों देते हैं और जब हम गलत राह पर जाते हैं तो हमें रोक क्यों नहीं लेते।Premananda Maharaj
इस पर Premananda Maharaj ने अत्यंत सरल और तार्किक उदाहरण देते हुए कहा—
“मान लीजिए किसी व्यक्ति ने आपको ₹100 दिए और बाजार भेज दिया। अब यह आपका चुनाव है कि आप उस पैसे से फल-मिठाई खरीदते हैं या उसे जुआ और शराब जैसे गलत कार्यों में खर्च करते हैं। देने वाले ने आपको केवल साधन दिया है, उसका उपयोग कैसे करना है, यह पूरी तरह आपके विवेक पर निर्भर है।”
Premananda Maharaj ने समझाया कि ईश्वर ने मनुष्य को हाथ, पैर, आंखें, वाणी और सबसे महत्वपूर्ण विवेक दिया है, जो एक ईश्वरीय पूंजी है। वाणी का चुनाव मनुष्य के हाथ में है—वह चाहे तो अपशब्द बोले या प्रभु का नाम जपे।
इंद्रियों का उपयोग भी हमारे निर्णय पर निर्भर करता है—आंखों से अश्लीलता देखी जा सकती है या ईश्वर के दर्शन किए जा सकते हैं, हाथों से किसी की मदद की जा सकती है या अहित।
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प्रेमानंद महाराज के अनुसार, मनुष्य जन्म हमें अपनी पूर्व गलतियों और बुरी आदतों को सुधारने का अवसर देता है। ईश्वर ने मनुष्य को कर्म की स्वतंत्रता दी है। यदि भगवान हर कदम पर हमें नियंत्रित करने लगें, तो पाप और पुण्य का कोई अर्थ ही नहीं रह जाएगा।
उन्होंने कहा कि हर गलत कार्य से पहले मनुष्य की अंतरात्मा उसे चेतावनी देती है, यही ईश्वर का संकेत है। लेकिन यदि व्यक्ति उस आवाज को अनसुना करता है, तो यह उसकी अपनी इच्छाशक्ति की कमजोरी है।
अंत में महाराज ने स्पष्ट किया कि भगवान रास्ता अवश्य दिखाते हैं, पर उस रास्ते पर चलना या न चलना मनुष्य के अपने हाथ में है। यही कर्म, जिम्मेदारी और जीवन का वास्तविक सत्य है।Premananda Maharaj



