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Petrol Diesel Price : क्या पेट्रोल-डीजल की कीमतों में राहत की उम्मीद

Petrol Diesel Price : भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की ताजा रिपोर्ट में दावा किया गया है कि वर्ष 2026 में कच्चे तेल की कीमतों में उल्लेखनीय कमी देखी जा सकती है। रिपोर्ट के अनुसार, जून 2026 तक ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत गिरकर 50 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है।

भंडार में वृद्धि से बढ़ेगा दबाव

एसबीआई की रिपोर्ट में बताया गया है कि बढ़ते हुए भंडार और वैश्विक स्तर पर कमजोर रुझानों के कारण 2026 में कच्चे तेल की कीमतों में वर्तमान स्तर से और भी नरमी आने की संभावना है। अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन ने अनुमान लगाया है कि 2026 की पहली तिमाही में ब्रेंट क्रूड की औसत कीमत 55 डॉलर प्रति बैरल तक आ सकती है।

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भारतीय तेल बाजार पर सीधा प्रभाव

वैश्विक और घरेलू कच्चे तेल की कीमतों के बीच मजबूत संबंध को देखते हुए, भारतीय कच्चे तेल की दरों में भी समान गिरावट की उम्मीद जताई जा रही है। भारतीय क्रूड बास्केट का ब्रेंट क्रूड के साथ 0.98 का सहसंबंध है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाले उतार-चढ़ाव का सीधा असर घरेलू तेल की कीमतों पर पड़ेगा।

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तकनीकी विश्लेषण भी देता है संकेत

तकनीकी विश्लेषण के आधार पर देखें तो वर्तमान में भारतीय क्रूड की कीमतें 50-पीरियड और 200-पीरियड दोनों मूविंग एवरेज से नीचे चल रही हैं। यह संकेत दर्शाता है कि मौजूदा 62.20 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से आगे और कमजोरी आ सकती है।

महंगाई पर पड़ेगा सकारात्मक असर

रिपोर्ट के अनुसार, कच्चे तेल की कीमतों में संभावित गिरावट से भारत की मुद्रास्फीति दर पर लाभकारी प्रभाव पड़ सकता है। अनुमान है कि भारतीय क्रूड बास्केट की कीमत घटकर 53.31 डॉलर प्रति बैरल तक आ सकती है।

दैनिक आधार पर लागू होने वाली डायनामिक प्राइसिंग प्रणाली के कारण यह गिरावट सीधे तौर पर पेट्रोल-डीजल के खुदरा भावों में भी परिलक्षित हो सकती है।

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उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में आएगी नरमी

रिपोर्ट में आकलन किया गया है कि यदि वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में भारतीय क्रूड बास्केट में 14 प्रतिशत की गिरावट आती है, तो 48 प्रतिशत पास-थ्रू मानते हुए, इसका प्रभाव उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) पर पड़ेगा और सीपीआई बास्केट पर लगभग 22 आधार अंकों का नकारात्मक दबाव बन सकता है।

इस मुद्रास्फीति में नरमी के परिणामस्वरूप वित्त वर्ष 2027 में औसत खुदरा महंगाई दर 3.4 प्रतिशत से नीचे आ सकती है। यह स्थिति न केवल ईंधन की कीमतों में राहत प्रदान करेगी, बल्कि समग्र महंगाई के मोर्चे पर भी अर्थव्यवस्था को महत्वपूर्ण समर्थन देगी।

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आम जनता को मिल सकती है बड़ी राहत

यदि यह अनुमान सही साबित होता है, तो देश की आम जनता को ईंधन की कीमतों में काफी राहत मिल सकती है। पेट्रोल-डीजल की कम कीमतों का सकारात्मक प्रभाव परिवहन लागत और अन्य वस्तुओं एवं सेवाओं की कीमतों पर भी पड़ेगा, जिससे आम नागरिकों की क्रय शक्ति में सुधार हो सकता है।

 

Seema Gariya

Asst. News Producer (T)

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