Oath Ceremony 2025 : सीपी राधाकृष्णन बने भारत के नए उपराष्ट्रपति, आज लेंगे शपथ
(Tehelka Desk)Oath Ceremony 2025 :
देश की राजनीति और संवैधानिक व्यवस्था के लिए आज का दिन ऐतिहासिक होने जा रहा है। BJP के वरिष्ठ नेता और तमिलनाडु से ताल्लुक रखने वाले CP Radhakrishnan आज भारत के नए उपराष्ट्रपति के रूप में शपथ लेंगे। राष्ट्रपति भवन के दरबार हाल में आयोजित होने वाले इस भव्य समारोह में देश के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, कैबिनेट मंत्री, सांसद, विपक्षी नेता, राज्यों के मुख्यमंत्री और कई गणमान्य लोग शामिल होंगे।
Oath Ceremony 2025 : कौन हैं सीपी राधाकृष्णन
सीपी राधाकृष्णन का नाम दक्षिण भारत की राजनीति और संगठनात्मक मजबूती के लिए जाना जाता है। वे दो बार कोयंबटूर से सांसद रह चुके हैं और लंबे समय तक BJP के तमिलनाडु प्रदेश अध्यक्ष भी रहे। पार्टी संगठन में उनकी पकड़, स्वच्छ छवि और दक्षिण भारत में बीजेपी की जड़ें मजबूत करने में उनके योगदान ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई।
राधाकृष्णन को एक सक्रिय समाजसेवी के रूप में भी जाना जाता है। उन्होंने हमेशा गरीबों और पिछड़े तबकों के उत्थान के लिए काम किया है। उनकी छवि एक ऐसे नेता की है जो जमीन से जुड़े हुए हैं और जनमानस की भावनाओं को समझते हैं।
Oath Ceremony 2025 : सफर
भारत का उपराष्ट्रपति देश का दूसरा सर्वोच्च संवैधानिक पद है। राधाकृष्णन का उपराष्ट्रपति पद तक पहुँचना न केवल उनकी व्यक्तिगत सफलता है, बल्कि यह दक्षिण भारत की राजनीति में भाजपा के बढ़ते प्रभाव का भी संकेत है।
उपराष्ट्रपति के रूप में उन्हें सबसे बड़ी जिम्मेदारी राज्यसभा के सभापति की निभानी होगी। राज्यसभा का संचालन करना, बहसों को संतुलित रखना और विपक्ष तथा सत्ता पक्ष के बीच संवाद को सहज बनाना उनकी नई भूमिका का अहम हिस्सा होगा।
Oath Ceremony 2025 : शपथ समारोह भव्यता
राष्ट्रपति भवन में होने वाले शपथ समारोह की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाएंगी। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह समेत तमाम केंद्रीय मंत्री मौजूद रहेंगे। विपक्षी दलों के वरिष्ठ नेता, कांग्रेस अध्यक्ष, क्षेत्रीय दलों के नेता भी समारोह का हिस्सा बनेंगे।
शपथ समारोह में राष्ट्रीय ध्वज, सेना की बैंड धुन और भारतीय लोकतंत्र की गरिमा को दर्शाने वाले प्रोटोकॉल का पालन किया जाएगा। यह आयोजन देश की लोकतांत्रिक परंपराओं और संवैधानिक मूल्यों की ताकत को दिखाएगा।
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Oath Ceremony 2025 : राजनीतिक महत्व
सीपी राधाकृष्णन का उपराष्ट्रपति बनना कई मायनों में खास है।
- दक्षिण भारत पर फोकस: लंबे समय से BJP दक्षिण भारत में अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश कर रही है। राधाकृष्णन का उपराष्ट्रपति बनना वहां के राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित करेगा।
- संगठन में अनुभव: पार्टी संगठन के पुराने और अनुशासित नेता होने के कारण वे विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच एक सेतु का काम कर सकते हैं।
- राज्यसभा में नई भूमिका: संसद के उच्च सदन में उनकी संयमित छवि और गंभीरता से चर्चा को सही दिशा देने की उम्मीद की जा रही है।
Oath Ceremony 2025 : विपक्ष का रुख
हालांकि कुछ विपक्षी दलों ने उपराष्ट्रपति चुनाव में अपना प्रत्याशी खड़ा किया था, लेकिन राधाकृष्णन की जीत लगभग तय मानी जा रही थी। उनके चुनाव को विपक्ष ने भी लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा मानते हुए सम्मान दिया। अब सबकी निगाहें इस बात पर होंगी कि वे राज्यसभा की कार्यवाही में विपक्ष को कितनी अहमियत देते हैं और सदन की गरिमा को बनाए रखते हैं।
Oath Ceremony 2025 : जनता की उम्मीदें
जनता की नज़र में उपराष्ट्रपति का पद भले ही औपचारिक लगे, लेकिन लोकतंत्र की मजबूती में इसकी भूमिका बेहद अहम होती है। राधाकृष्णन से उम्मीद है कि वे युवा पीढ़ी को प्रेरित करेंगे, दक्षिण और उत्तर भारत के बीच सांस्कृतिक जुड़ाव को बढ़ाएंगे और संविधान की मर्यादाओं को बनाए रखेंगे।
लोग यह भी मानते हैं कि वे शिक्षा, विकास और सामाजिक न्याय के मुद्दों पर एक सकारात्मक पहल कर सकते हैं।
Oath Ceremony 2025 : महत्व
- उपराष्ट्रपति भारत का दूसरा सर्वोच्च संवैधानिक पद है।
- वे राज्यसभा के सभापति होते हैं और उच्च सदन का संचालन करते हैं।
- राष्ट्रपति के अनुपस्थित रहने या असमर्थ होने की स्थिति में उपराष्ट्रपति कार्यकारी राष्ट्रपति बनते हैं।
- यह पद राजनीति और संविधान के बीच संतुलन बनाए रखने का प्रतीक है।
आज का शपथ समारोह भारतीय लोकतंत्र के लिए गौरव का क्षण है। सीपी राधाकृष्णन का उपराष्ट्रपति पद की शपथ लेना न केवल उनकी राजनीतिक यात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव है, बल्कि यह देश के राजनीतिक परिदृश्य में एक नया अध्याय भी है। उनसे उम्मीद की जा रही है कि वे राज्यसभा की कार्यवाही को और अधिक सार्थक बनाएंगे और संविधान की आत्मा के अनुरूप काम करेंगे।
भारत के लोकतांत्रिक ढांचे में उनकी भूमिका आने वाले सालों में कितनी प्रभावशाली होगी, यह देखने योग्य होगा। लेकिन इतना तय है कि आज का दिन भारतीय राजनीति और संवैधानिक व्यवस्था के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में दर्ज होगा।


