धार्मिक

Karwa Chauth 2025 : जानें पूजा का मुहूर्त, चंद्रोदय का समय और व्रत की पूरी विधि

(Tehelka Desk)Karwa Chauth 2025 : 

Karwa Chauth भारत की सबसे पवित्र और लोकप्रिय व्रत परंपराओं में से एक है, जिसे विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और दांपत्य जीवन की खुशहाली के लिए रखती हैं। हर साल यह पर्व कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है। 2025 में करवा चौथ 9 अक्टूबर (गुरुवार) को मनाया गया और इस वर्ष यह पर्व विशेष योग और शुभ मुहूर्त में पड़ा, जिससे इसका धार्मिक महत्व और भी बढ़ गया है।

Karwa Chauth 2025 : तिथि और शुभ मुहूर्त

करवा चौथ का व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए एक आस्था और प्रेम का प्रतीक है। इस वर्ष चतुर्थी तिथि का आरंभ 9 अक्टूबर 2025 को सुबह 6:14 बजे हुआ और इसका समापन 10 अक्टूबर को सुबह 4:02 बजे हुआ।

Hotel Management

पूजा मुहूर्त: शाम 5:50 बजे से रात 7:10 बजे तक
चंद्रोदय का समय: रात 8:22 बजे
उदयमान चंद्र का दर्शन: व्रत तोड़ने का शुभ समय

इस दिन महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं यानी बिना जल के पूरे दिन उपवास करती हैं। वे केवल चंद्रमा के दर्शन और पूजा के बाद ही जल ग्रहण करती हैं।

Karwa Chauth 2025 : धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व

करवा चौथ केवल व्रत का दिन नहीं है, बल्कि यह भारतीय नारी शक्ति, समर्पण और प्रेम का प्रतीक है। परंपरा के अनुसार, इस दिन महिलाएं सोलह श्रृंगार करती हैं, भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश जी की पूजा करती हैं।

माना जाता है कि माता पार्वती ने सबसे पहले यह व्रत अपने पति भगवान शिव के दीर्घायु होने के लिए रखा था, तब से यह परंपरा चली आ रही है। “करवा” का अर्थ होता है मिट्टी का पात्र (कलश) और “चौथ” का अर्थ चौथी तिथि। इस दिन करवा में जल भरकर चंद्रमा को अर्घ्य दिया जाता है और पति के लिए मंगलकामना की जाती है।

Karwa Chauth 2025 : पूजा विधि

  1. सवेरे स्नान कर संकल्प लें — “मैं अपने पति की दीर्घायु के लिए यह व्रत रखती हूं।”
  2. सोलह श्रृंगार करें — लाल जोड़ा, सिंदूर, चूड़ी, बिंदी, और गहनों से सजें।
  3. करवा चौथ कथा का श्रवण करें — पारंपरिक कथा सुनना व्रत का महत्वपूर्ण भाग है।
  4. करवा में जल भरें — पूजा के समय माता पार्वती और गणेश जी की आराधना करें।
  5. करवा चौथ थाली सजाएं — इसमें करवा, दीपक, मिठाई, सिंदूर, चावल और कपूर रखें।
  6. चंद्रोदय के बाद पूजा करें — चंद्रमा को अर्घ्य देकर पति के हाथों से जल ग्रहण करें और व्रत समाप्त करें।

Karwa Chauth 2025 :  कथा

कथा के अनुसार, एक सती-साध्वी स्त्री जिसका नाम करवा था, अपने पति के प्रति अटूट प्रेम और समर्पण के लिए जानी जाती थी। जब एक बार उनके पति नदी में स्नान कर रहे थे, तब एक मगरमच्छ ने उन्हें पकड़ लिया। करवा ने अपने तप और भक्ति से यमराज को बुलाया और अपने पति की रक्षा की। यमराज ने उसकी सच्ची निष्ठा देखकर उसके पति को जीवनदान दिया। तभी से यह व्रत हर वर्ष कार्तिक कृष्ण चतुर्थी को किया जाने लगा।

Horoscope 2025 : मेष से लेकर मीन तक, जानें कैसा रहेगा आपका आज का दिन

Karwa Chauth 2025 : प्रेम और आधुनिकता का संगम

जहां पहले करवा चौथ केवल विवाहित महिलाओं द्वारा रखा जाता था, वहीं अब यह प्रेम और रिश्तों का उत्सव बन चुका है। आज कई पुरुष भी अपनी पत्नियों के साथ व्रत रखते हैं। बॉलीवुड फिल्मों और टीवी धारावाहिकों ने भी इस परंपरा को लोकप्रिय बना दिया है।

आज के समय में यह व्रत केवल धार्मिक नहीं, बल्कि भावनात्मक रूप से पति-पत्नी के रिश्ते को और मजबूत करने का माध्यम बन गया है।

Karwa Chauth 2025 : क्या करें और क्या न करें

क्या करें:

  • सुबह सूर्योदय से पहले सरगी ग्रहण करें।
  • पूजा के समय दक्षिण दिशा की ओर मुख करके आराधना करें।
  • दिन भर सकारात्मक सोच रखें और पति की मंगलकामना करें।

Karwa Chauth 2025 : क्या न करें:

  • किसी का अपमान न करें या कटु वचन न बोलें।
  • दिन में सोने या गुस्सा करने से बचें।
  • बिना चंद्र दर्शन किए व्रत न तोड़ें।

Karwa Chauth 2025 : सरगी का महत्व

सरगी वह भोजन होता है जो सास अपनी बहू को व्रत शुरू करने से पहले देती हैं। इसमें मिठाई, फल, सूखे मेवे और हल्का भोजन शामिल होता है। यह परंपरा सास-बहू के रिश्ते में प्रेम और आशीर्वाद का प्रतीक है।

Karwa Chauth 2025 : खगोल और ज्योतिषीय दृष्टि

इस वर्ष चंद्रमा कन्या राशि में और चतुर्थी तिथि पर रोहिणी नक्षत्र में उदित हुआ, जो दांपत्य जीवन के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इस योग में व्रत करने से दांपत्य जीवन में सौभाग्य और सुख की वृद्धि होती है।

Karwa Chauth 2025 : मंत्र

पूजा के दौरान यह मंत्र जपना अत्यंत शुभ माना जाता है —
“ॐ उमामहेश्वराय नमः।”
यह मंत्र पारिवारिक सुख, समृद्धि और दांपत्य प्रेम बढ़ाने में सहायक होता है।

करवा चौथ भारतीय संस्कृति का वो पर्व है जो प्रेम, निष्ठा और आस्था का प्रतीक है। यह दिन महिलाओं की शक्ति और उनके समर्पण की कहानी कहता है। 2025 में यह पर्व शुभ संयोग में आया है, इसलिए इस बार का व्रत विशेष फलदायी रहेगा। जो महिलाएं पूरे विधि-विधान से पूजा करेंगी, उनके जीवन में सौभाग्य, समृद्धि और दांपत्य सुख की वृद्धि होगी।

 

Seema Gariya

Asst. News Producer (T)

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Articles

Back to top button