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Israeli Attack :  इजरायल के हमले के बाद ट्रंप की खुली चेतावनी,  डील कर लो वरना परिणाम भुगतना

Tehelka Desk(Muskan Kanojia) Israeli Attack :  इजरायल के हमले के बाद ट्रंप की प्रतिक्रिया

Israel  ने जून 2025 में ईरान के परमाणु और सैन्य ठिकानों पर एक बड़े हमले की योजना बनाई, जिसे “ऑपरेशन राइजिंग लायन” कहा गया। इस हमले में ईरान के शीर्ष सैन्य अधिकारियों और परमाणु वैज्ञानिकों की मौत हो गई। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस हमले की खुलकर सराहना की और ईरान को चेतावनी दी कि यदि उसने परमाणु समझौते पर सहमति नहीं जताई, तो और भी गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। उन्होंने कहा, “यह तो सिर्फ शुरुआत है, आगे और भी बहुत कुछ होने वाला है।”

Israeli Attack :  ट्रंप की चेतावनी और ईरान की प्रतिक्रिया

ट्रंप ने ईरान को एक 60-दिन की समयसीमा दी थी, जो अब समाप्त हो चुकी है। उन्होंने कहा कि ईरान ने कई मौकों पर परमाणु समझौते पर सहमति नहीं जताई, जिसके कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है। ट्रंप ने ईरान से अपील की कि वह अभी भी समझौते की ओर बढ़े, अन्यथा स्थिति और भी बिगड़ सकती है।

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ईरान ने ट्रंप की चेतावनी को नकारते हुए कहा कि अमेरिका की यह नीति “धोखा” है और वह किसी भी प्रकार के दबाव के आगे नहीं झुकेगा। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने कहा कि ट्रंप का प्रस्ताव केवल दिखावा है और उनका उद्देश्य ईरान को बातचीत के लिए मजबूर करना है।

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Israeli Attack :  क्षेत्रीय तनाव और वैश्विक प्रतिक्रिया

इजरायल के हमले के बाद, ईरान ने 13 जून 2025 को 150 से अधिक बैलिस्टिक मिसाइलों और 100 से अधिक ड्रोन के माध्यम से इजरायल पर जवाबी हमला किया। इस हमले में इजरायल के 22 नागरिक घायल हुए। अमेरिका ने इजरायल के इस हमले का समर्थन किया, जबकि ईरान ने इसे “युद्ध की घोषणा” करार दिया।

संयुक्त राष्ट्र ने इस स्थिति पर आपातकालीन सुरक्षा परिषद की बैठक बुलाई है, जबकि वैश्विक नेताओं ने संयम बरतने की अपील की है, ताकि क्षेत्रीय संघर्ष और भी न बढ़े।

Israeli Attack :  ट्रंप की विदेश नीति और ईरान के प्रति रुख

ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल में ईरान के खिलाफ “अधिकतम दबाव” अभियान को फिर से लागू किया है, जिसमें ईरान के तेल निर्यात को शून्य करने का लक्ष्य रखा गया है। इस नीति के तहत, ईरान की अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ा है, जिससे वहां राजनीतिक अस्थिरता भी बढ़ी है।

ट्रंप ने ईरान को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि वह अपने परमाणु कार्यक्रम को समाप्त नहीं करता, तो अमेरिका सैन्य कार्रवाई भी कर सकता है। उन्होंने कहा, “ईरान को एक परमाणु हथियार नहीं रखना चाहिए, और यदि वे ऐसा करते हैं, तो अमेरिका चुप नहीं बैठेगा।

इजरायल के हमले और ट्रंप की चेतावनियों ने मध्य पूर्व में तनाव को और बढ़ा दिया है। ईरान ने अमेरिका की दबाव रणनीति को नकारते हुए अपनी स्थिति स्पष्ट की है, जबकि अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर दबाव बनाए रखने की योजना बनाई है। इस स्थिति में, यदि ईरान और अमेरिका के बीच कोई समझौता नहीं होता, तो क्षेत्रीय युद्ध की संभावना बढ़ सकती है, जिससे वैश्विक शांति और सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ सकता है।

pramesh manori

Asst. News Producer (T)

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