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Illegal water diversion: नगर पालिका परिषद के खिलाफ स्थानीय लोगों का फूटा गुस्सा

रुड़की : (रिपोर्ट-अरशद हुसैन) Illegal water diversion : बरसात के मौसम से ठीक पहले नगर पालिका परिषद की जल निकासी व्यवस्था को लेकर उठाए जा रहे कदमों पर स्थानीय लोगों का आक्रोश सामने आया है। थानेवाले रोड इलाके में नाले खोलने पहुंची नगर पालिका और पुलिस की संयुक्त टीम को स्थानीय नागरिकों के भारी विरोध का सामना करना पड़ा। नागरिकों का कहना है कि पालिका प्रशासन जल निकासी की दिशा को जानबूझकर बदल रहा है, जो न सिर्फ अव्यवस्थित है बल्कि उनके क्षेत्र में जलभराव की समस्या को और अधिक बढ़ा सकती है।


Illegal water diversion: स्थानीय नागरिकों का आरोप

स्थानीय लोगों ने बताया कि परंपरागत रूप से वर्षा जल एक पुराने तालाब की ओर बहता आया है। यह व्यवस्था वर्षों से चली आ रही थी और इससे जल निकासी में कोई समस्या नहीं होती थी। हालांकि, अब नगर पालिका द्वारा इस जल को विपरीत दिशा में मोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

स्थानीय निवासी विजयपाल शर्मा ने बताया, “तालाब की ओर पानी जाने से न सिर्फ आसानी से निकासी हो जाती थी, बल्कि आस-पास के इलाके सूखे रहते थे। अब नगर पालिका जबरदस्ती इसे दूसरी दिशा में ले जाकर जलभराव का संकट पैदा करना चाहती है।”

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Illegal water diversion : पुलिस टीम को भी झेलना पड़ा रोष

इस मुद्दे पर स्थानीय नागरिकों ने विरोध प्रदर्शन किया और काफी देर तक सड़क पर हंगामा किया। गुस्साए लोगों ने नगर पालिका परिषद पर ‘गुंडागर्दी’ का आरोप लगाया। उनका कहना था कि जॉइंट मजिस्ट्रेट द्वारा दिए गए आदेशों के बावजूद परिषद अपनी मर्जी से काम कर रही है।

विरोध कर रहे एक अन्य स्थानीय निवासी सुनीता देवी ने कहा, “यह प्रशासन नहीं गुंडाराज है। जनता की चिंता किसी को नहीं है। हम साफ-सफाई और व्यवस्था के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन गलत योजना को जबरदस्ती थोपना ठीक नहीं।”

Illegal water diversion: पालिका का पक्ष

मामले पर नगर पालिका परिषद के अधिशासी अधिकारी नौशाद हसीन ने सफाई दी। उन्होंने बताया कि परिषद का उद्देश्य सिर्फ जल निकासी व्यवस्था को बेहतर बनाना है और इसके तहत ही थानेवाले रोड की बंद नालियों को खोला जा रहा था।

हसीन ने कहा, “कुछ स्थानीय लोगों ने खुद ही नालियों को अवरुद्ध कर रखा है। हम उन्हें साफ करने पहुंचे थे ताकि आने वाले दिनों में बरसात के दौरान मोहल्ले में जलभराव की स्थिति न हो। परंतु स्थानीय लोगों ने विरोध जताया, जिससे समस्या और जटिल हो गई।”


Illegal water diversion: भविष्य में क्या उठाए जाएंगे कदम?

इस पूरे विवाद से एक बात स्पष्ट हो गई है कि नगर निकाय और स्थानीय जनता के बीच संवाद की भारी कमी है। नगर पालिका की योजना भले ही जनहित में हो, लेकिन उसे लागू करने के तरीके पर सवाल उठना स्वाभाविक है जब जनता खुद को अनसुना महसूस करे।

इस घटना के बाद सवाल उठता है कि क्या नगर पालिका परिषद इस प्रकार के कार्यों से पहले जनसुनवाई या क्षेत्रीय बैठकें आयोजित करेगी? क्या भविष्य में विकास योजनाओं में नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी?

Illegal water diversion: राजनीतिक प्रतिक्रिया भी आई सामने

विपक्षी पार्षद राजीव राणा ने इस मामले को नगर पालिका की “एकतरफा कार्यशैली” का उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन इसी तरह नागरिकों की अनदेखी करता रहा, तो शहर में हर योजना विवाद का कारण बन सकती है।

Illegal water diversion: निगम और नागरिकों के बीच संवाद की कमी

यह पूरा घटनाक्रम नगर निकाय और नागरिकों के बीच संवादहीनता को दर्शाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी विकास कार्य से पहले Stakeholder Consultation यानी नागरिकों और अन्य संबंधित पक्षों की भागीदारी अनिवार्य होनी चाहिए।


Illegal water diversion: संवाद से ही सुलझेगा टकराव

मंगलौर नगर में जल निकासी की यह समस्या अकेले एक मोहल्ले की नहीं, बल्कि पूरे शहर के लिए एक चेतावनी है। यह घटना बताती है कि किसी भी योजना को लागू करने से पहले उस क्षेत्र की जनता को विश्वास में लेना कितना आवश्यक है। अन्यथा प्रशासन और नागरिकों के बीच अविश्वास और टकराव जैसी स्थितियाँ पैदा होती रहेंगी।

pramesh manori

Asst. News Producer (T)

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