Hariyali Teej 2025 : हरियाली तीज आज, जानिए पूजन का शुभ मुहूर्त, व्रत कथा और उपासना विधि
(Tehelka Desk)Harilyai Teej 2025 :
हरियाली तीज का धार्मिक महत्व
Harilyai Teej भारत के प्रमुख त्योहारों में से एक है, जो सावन महीने में श्रावण शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। यह पर्व विशेष रूप से सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है, जो इस दिन व्रत रखकर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती हैं। इस दिन को प्रेम, सौभाग्य और नारी शक्ति के प्रतीक पर्व के रूप में जाना जाता है।
हरियाली तीज को ‘श्रृंगार तीज’ या ‘चोटी तीज’ भी कहा जाता है। यह पर्व माता पार्वती के 108 जन्मों की तपस्या के बाद भगवान शिव को प्राप्त करने के दिन की स्मृति में मनाया जाता है।
Hariyali Teej 2025 : शुभ मुहूर्त और पंचांग
- तृतीया तिथि आरंभ: 27 जुलाई 2025, रविवार को सुबह 03:48 बजे
- तृतीया तिथि समाप्त: 28 जुलाई 2025, सोमवार को सुबह 02:11 बजे
- पूजन का सर्वश्रेष्ठ समय:
- प्रातःकालीन पूजा: 06:00 AM से 08:30 AM
- अभिजीत मुहूर्त: 12:04 PM से 12:57 PM
- संध्या पूजन: 06:30 PM से 08:00 PM
- राहुकाल (अशुभ समय): दोपहर 04:30 PM से 06:00 PM तक
Hariyali Teej 2025 : पूजन विधि और व्रत रखने की प्रक्रिया
हरियाली तीज का व्रत स्त्रियां निर्जला व्रत के रूप में करती हैं, यानी दिनभर जल तक ग्रहण नहीं किया जाता। व्रत और पूजा विधि इस प्रकार है:
व्रत विधि:
- प्रातः स्नान करके निर्जला व्रत का संकल्प लें।
- घर या मंदिर में एक साफ स्थान पर भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
- माता पार्वती को हरे वस्त्र, श्रृंगार सामग्री (मेंहदी, चूड़ियां, बिंदी, सिंदूर) अर्पित करें।
- पूजा में हल्दी, चंदन, अक्षत, बेलपत्र, धतूरा, मदार के फूल, घी का दीपक, मिठाई, फल आदि चढ़ाएं।
- हरियाली तीज व्रत कथा सुनें या पढ़ें। यह कथा माता पार्वती की तपस्या और शिव से विवाह की कहानी है।
- रात्रि में चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद व्रत का पारण करें, लेकिन कुछ महिलाएं इसे अगले दिन सूर्योदय के बाद भी खोलती हैं।
Hariyali Teej 2025 : हरियाली तीज व्रत कथा
माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए 108 जन्मों तक कठोर तपस्या की थी। 108वें जन्म में उन्होंने हिमालय पुत्री के रूप में जन्म लिया और घोर तप कर शिव को प्रसन्न किया। सावन शुक्ल तृतीया के दिन भगवान शिव ने पार्वती को अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया।
इसी दिन को हरियाली तीज के रूप में मनाया जाता है। यह व्रत स्त्रियों के सौभाग्य, प्रेम और निष्ठा का प्रतीक है।
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Hariyali Teej 2025 : सांस्कृतिक परंपराएं
हरियाली तीज केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक रूप से भी बहुत समृद्ध पर्व है।
महिलाओं का श्रृंगार:
- हरे रंग के वस्त्र पहनना
- मेंहदी लगाना
- चूड़ियां, बिंदी, झुमके, हार आदि से सजना
- ‘सोलह श्रृंगार’ करना शुभ माना जाता है
झूला झूलना और गीत गाना:
- हरियाली के प्रतीक के रूप में पीपल या नीम की शाखाओं पर झूले लगाए जाते हैं
- महिलाएं समूह में तीज गीत गाती हैं और लोकनृत्य करती हैं
सिंधारा प्रथा:
- विवाहित महिलाएं अपने मायके से सिंधारा (श्रृंगार और मिठाइयों का उपहार) प्राप्त करती हैं
- इसमें घेवर, फेनी, चूड़ी, साड़ी आदि शामिल होती हैं
Hariyali Teej 2025 : पारंपरिक व्यंजन
हरियाली तीज पर विशेष रूप से बनाए जाने वाले कुछ व्यंजन इस प्रकार हैं:
- घेवर: राजस्थान और हरियाणा की प्रसिद्ध मिठाई
- फेनी: दूध के साथ सेवन की जाती है
- मालपुए, खीर, पूड़ी-आलू, लड्डू आदि
हालांकि व्रतधारी महिलाएं पूजा और अर्घ्य के बाद ही ये व्यंजन ग्रहण करती हैं।
Hariyali Teej 2025 : आध्यात्मिक और सामाजिक महत्व
हरियाली तीज का महत्व केवल धार्मिक नहीं, बल्कि नारी सशक्तिकरण, पारिवारिक एकता और सामाजिक मेलजोल से भी जुड़ा है। यह पर्व:
- स्त्री के सौंदर्य और आत्मबल का उत्सव है
- पति-पत्नी के प्रेम का प्रतीक है
- प्रकृति के प्रति सम्मान और हरियाली के संरक्षण का संदेश देता है
हरियाली तीज केवल एक पर्व नहीं, बल्कि नारी शक्ति, प्रकृति प्रेम और पारिवारिक समरसता का उत्सव है। यह पर्व न केवल धार्मिक आस्था से जुड़ा है, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक समरसता का भी प्रतीक है।
हरियाली तीज पर महिलाएं शिव-पार्वती की पूजा कर अपने वैवाहिक जीवन की सुख-शांति और अखंड सौभाग्य की कामना करती हैं। यह पर्व भारतीय संस्कृति की गौरवशाली परंपरा, नारी की भक्ति और प्रकृति से जुड़े रिश्ते को दर्शाता है।


