G20 Summit 2025 : G20 शिखर सम्मेलन में PM मोदी का स्वागत, ट्रंप–पुतिन की दूरी बनी कूटनीति की बड़ी चुनौती
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(Tehelka Desk)G20 Summit 2025 :
दुनिया की सबसे प्रभावशाली अर्थव्यवस्थाओं का मंच G20 एक बार फिर वैश्विक राजनीति, कूटनीति और आर्थिक रणनीति का केंद्र बन गया है। इस बार का सम्मेलन कई मायनों में ऐतिहासिक माना जा रहा है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शिखर सम्मेलन में पहुंच चुके हैं, जहां उनकी अगवानी मेजबान देश के राष्ट्रपति ने की। मंच पर पहुंचते ही PM मोदी का स्वागत गर्मजोशी से हुआ, और दुनिया की नज़रें एक बार फिर भारत के नेतृत्व और भूमिका पर टिक गई हैं।
लेकिन इस बार मंच पर दो बड़े नेताओं की गैरमौजूदगी ने नए राजनीतिक समीकरणों को हवा दे दी है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने सम्मेलन से किनारा कर लिया है। इन दोनों देशों–विशेषकर रूस और अमेरिका—की अनुपस्थिति ने वैश्विक स्तर पर कई प्रश्न खड़े कर दिए हैं। क्या दुनिया एक नए ध्रुवीकरण की ओर बढ़ रही है? क्या यह संकेत किसी बड़े भू-राजनीतिक बदलाव का है? और सबसे अहम इस स्थिति में भारत की भूमिका क्या होगी?
आइए विस्तार से समझते हैं—
G20 Summit 2025 : PM मोदी का आगमन
PM मोदी का G20 में आगमन सिर्फ एक औपचारिकता नहीं, बल्कि एक बार फिर उनके वैश्विक नेतृत्व की पुष्टि है। जैसे ही वह सम्मेलन स्थल पहुंचे, मेजबान देश के राष्ट्रपति ने उनका औपचारिक स्वागत किया। यह दृश्य विश्वभर के मीडिया प्लेटफॉर्म पर तुरंत वायरल हो गया।
शिखर सम्मेलन में PM मोदी की मौजूदगी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत हाल के वर्षों में वैश्विक मंचों पर एक निर्णायक आवाज के रूप में उभरा है। जलवायु परिवर्तन, वैश्विक अर्थव्यवस्था, दक्षिणी देशों के हित, आर्थिक असमानता और वैश्विक सप्लाई चेन की स्थिरता जैसे मुद्दों पर भारत लगातार परिपक्व एवं संतुलित दृष्टिकोण पेश करता रहा है।
माना जा रहा है कि इस बार PM मोदी वैश्विक आर्थिक स्थिरता, डेवलपिंग नेशंस की आवाज़, और शांति प्रयास जैसे विषयों पर बड़े प्रस्ताव पेश कर सकते हैं।
G20 Summit 2025 : राष्ट्रपति द्वारा स्वागत
मेजबान देश के राष्ट्रपति द्वारा PM मोदी का आधिकारिक और सार्वजनिक स्वागत ही इस बात का संकेत है कि इस बार के G20 में भारत की भूमिका कितनी अहम रहने वाली है। पिछले वर्षों में भारत ने न सिर्फ अपनी आर्थिक भूमिका को मजबूत किया है, बल्कि वैश्विक संकटों—खासतौर पर महामारी, आपूर्ति शृंखला, ऊर्जा संकट और रूस–यूक्रेन युद्ध जैसे मामलों में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि इस बार के G20 में भारत—
- ग्लोबल साउथ के देशों के एक मजबूत समूह का प्रतिनिधित्व करेगा
- उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए वित्तीय सुधारों की मांग रखेगा
- शांति और स्थिरता के लिए मध्यस्थ की भूमिका निभा सकता है
G20 Summit 2025 : अमेरिकी राजनीति में बदलता समीकरण
सबसे बड़ी चर्चा इस बात पर हो रही है कि डोनाल्ड ट्रंप ने शिखर सम्मेलन से दूरी क्यों बनाई?
अमेरिका में चुनावी माहौल है और ट्रंप की नीतियाँ अक्सर बहुपक्षीय मंचों से अलग दिखती रही हैं। ट्रंप प्रशासन पहले भी G7 और NATO जैसे मंचों पर परंपरागत अमेरिकी नीतियों से हटकर कदम उठाता रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार ट्रंप का G20 से किनारा करना—
- अमेरिका की आंतरिक राजनीति
- ट्रंप की “अमेरिका फर्स्ट” नीति
- बहुपक्षीय मंचों के प्रति उनका संदेह
—इन कारणों का मिश्रित संकेत है।
यह भी चर्चा है कि राजनीतिक माहौल में ट्रंप अंतरराष्ट्रीय मंच पर उपस्थित होकर घरेलू मुद्दों से ध्यान हटाना नहीं चाहते थे।
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G20 Summit 2025 : वैश्विक तनाव के बीच बड़ा संकेत
G20 में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की अनुपस्थिति भी एक बेहद अहम संकेत है।
रूस–यूक्रेन युद्ध जारी है, पश्चिमी देशों के साथ कूटनीतिक तनाव चरम पर है और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों ने रूस को एक चुनौतीपूर्ण स्थिति में डाल दिया है।
विश्लेषकों का कहना है—
- पुतिन के आने से पश्चिमी देशों के साथ तनाव बढ़ सकता था
- अंतरराष्ट्रीय गिरफ्तारी वारंट की वजह से पुतिन सीमित यात्रा करते हैं
- रूस इस बार कूटनीति की जगह दूरी बनाकर अपने रुख को जताना चाहता है
हालांकि रूस की ओर से एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधि सम्मेलन में हिस्सा ले रहा है, जिससे संकेत मिलता है कि रूस मंच से पूरी तरह अलग नहीं होना चाहता।
G20 Summit 2025 : भारत की कूटनीति
ट्रंप और पुतिन की अनुपस्थिति ने भारत के लिए कूटनीतिक अवसर भी खोले हैं।
भारत इन देशों के बीच पुल की तरह काम कर सकता है, क्योंकि—
- भारत अमेरिका, रूस और यूरोप—तीनों के साथ संबंधों में संतुलन बनाए रखता है
- भारत वैश्विक दक्षिण (Global South) की सबसे बड़ी और मजबूत आवाज है
- ऊर्जा, खाद्य सुरक्षा और शांति—तीनों मुद्दों पर भारत की स्थिति सबसे विश्वसनीय मानी जाती है
इसलिए इस बार भारत की कूटनीति की परीक्षा भी है और मौका भी।
G20 Summit 2025 : अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों की नज़र में यह G20 क्यों खास?
यह शिखर सम्मेलन इसलिए खास है क्योंकि दुनिया अभी भी—
- युद्धों
- आर्थिक मंदी
- आपूर्ति शृंखला टूटने
- जलवायु संकट
- और राष्ट्रवाद की लहर
—इन सभी का सामना कर रही है।
ऐसे समय में G20 का मंच किसी भी वैश्विक प्रयास का केंद्र बनता है।
भारत इस सम्मेलन में समावेशी विकास, तकनीकी सहयोग, डिजिटल ढांचा, और शांति प्रयासों पर ठोस सुझाव रख सकता है।
PM मोदी का G20 में आगमन जहां भारत की मजबूत वैश्विक मौजूदगी का संकेत है, वहीं ट्रंप और पुतिन की अनुपस्थिति वैश्विक राजनीति में नए बदलावों का संकेत दे रही है। यह सम्मेलन आने वाले वर्षों में अंतरराष्ट्रीय संबंधों, व्यापार, सुरक्षा और शांति के बड़े फैसलों की दिशा तय कर सकता है। दुनिया की नज़रों में अब भारत है—और यह देश इस मंच का नेतृत्व करने की पूरी क्षमता रखता है।


