Fire Safety Training 2025 : दून मेडिकल कालेज अस्पताल में फायर सेफ्टी, ट्रायल अब महीने में दो बार
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- 0.0.1 Fire Safety Training 2025 : इमरजेंसी यूनिट में फायर सेफ्टी का ट्रायल
- 0.0.2 Fire Safety Training 2025 : कई अस्पतालों में आगजनी की घटनाएं आई है सामने
- 0.0.3 Fire Safety Training 2025 : कर्मचारियों को तकनीकी जानकारी होना अत्यंत आवश्यक
- 0.0.4 Fire Safety Training 2025 : फायर सेफ्टी सिर्फ एक औपचारिकता नहीं
- 0.0.5 Fire Safety Training 2025 : ट्रायल प्रशासन भी है सख्त
- 1 PM MODI SPEECH 2025 : लोकसभा में गूंजा‘वंदे मातरम्’150 साल की गाथा पर बोले पीएम मोदी
(Tehelka Desk) Fire Safety Training 2025 :
DEHRADUN राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल में फायर सेफ्टी को लेकर अब और सख्ती बरती जाएगी। अस्पताल प्रशासन ने निर्णय लिया है कि हर महीने दो बार फायर सेफ्टी ट्रायल आयोजित किया जाएगा। इन ट्रायल्स में सुरक्षाकर्मियों के साथ-साथ अन्य संविदा कर्मचारी भी शामिल होंगे। उद्देश्य यह है कि आपात स्थिति में कोई भी कर्मचारी घबराए नहीं और तेज़ी से सही तरीके से प्रतिक्रिया कर सके।
Fire Safety Training 2025 : इमरजेंसी यूनिट में फायर सेफ्टी का ट्रायल
सोमवार को अस्पताल की इमरजेंसी यूनिट में फायर सेफ्टी का ट्रायल किया गया, जिसमें आग लगने की स्थिति को ध्यान में रखते हुए पूरे सिस्टम का परीक्षण किया गया। ट्रायल के दौरान फायर अलार्म सक्रिय किए गए, फायर एक्सटिंग्यूशर चलाए गए, धुएं की दिशा, आग रोकने के उपायों और मरीजों को सुरक्षित बाहर निकालने की प्रक्रिया को लागू कर देखा गया।
Fire Safety Training 2025 : कई अस्पतालों में आगजनी की घटनाएं आई है सामने
अस्पताल प्रशासन ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में राज्य के कई अस्पतालों में आगजनी की घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें आर्थिक नुकसान के साथ-साथ मरीजों की जान पर भी खतरा बढ़ा। इन्हीं घटनाओं को ध्यान में रखते हुए दून मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने पहले की तुलना में अधिक सतर्कता अपनाने का निर्णय लिया है।
Fire Safety Training 2025 : कर्मचारियों को तकनीकी जानकारी होना अत्यंत आवश्यक
फायर सेफ्टी ट्रायल के दौरान विशेषज्ञों ने बताया कि अस्पतालों में छोटे-छोटे उपकरणों से लेकर ऑक्सीजन सिलेंडर, इलेक्ट्रिक वायरिंग और गर्मी पैदा करने वाली मशीनों तक, कई तरह के जोखिम मौजूद रहते हैं। ऐसे में कर्मचारियों को तकनीकी जानकारी होना अत्यंत आवश्यक है। ट्रायल के दौरान प्रत्येक कर्मचारी को सिखाया गया कि आग लगने पर पहला कदम क्या होना चाहिए, किस दिशा में मरीजों को निकाला जाए, एक्सिट रूट कैसे इस्तेमाल किए जाएं और किस उपकरण का उपयोग कब किया जाए।
Fire Safety Training 2025 : फायर सेफ्टी सिर्फ एक औपचारिकता नहीं
अस्पताल के सुरक्षा अधिकारी ने कहा कि फायर सेफ्टी सिर्फ एक औपचारिकता नहीं है, बल्कि जान बचाने की योजना है ,उन्होंने कहा कि ट्रायल से कर्मचारियों के आत्मविश्वास में बढ़ोतरी होती है और उन्हें पता चलता है कि वास्तविक घटना में क्या करना है। इस दौरान कर्मचारियों को यह भी बताया गया कि किस प्रकार एक मिनट की देरी भी बड़ा खतरा बन सकती है।
Fire Safety Training 2025 : ट्रायल प्रशासन भी है सख्त
ट्रायल के दौरान यह भी जांचा गया कि अस्पताल में अलग-अलग ब्लॉकों तक फायर अलार्म की आवाज कितनी देर में पहुंचती है, फायर टीम का रिस्पॉन्स टाइम क्या है, और उपकरणों की स्थिति कैसी है। कुछ स्थानों पर छोटे सुधार की आवश्यकता पाई गई, जिन्हें तुरंत ठीक करने के निर्देश दिए गए। प्रशासन ने कहा कि आगे आने वाले ट्रायल्स में इन कमियों को विशेष रूप से जांचा जाएगा।
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Fire Safety Training 2025 : मरीजों की सुरक्षा सर्वोपरि
अस्पताल की ओर से बताया गया कि मरीजों की सुरक्षा सर्वोपरि है। इसलिए फायर सेफ्टी के साथ-साथ इमरजेंसी एग्जिट, स्ट्रेचर मूवमेंट, सीढ़ियों की सफाई, मार्ग में मौजूद बाधाओं को हटाने और रात की ड्यूटी में मौजूद कर्मचारियों को भी बराबर प्रशिक्षण देने पर जोर दिया जाएगा। अस्पताल प्रशासन जल्द ही फायर सेफ्टी मॉक ड्रिल की वीडियो रिकॉर्डिंग भी करेगा ताकि गलती होने पर तुरंत समीक्षा की जा सके और सुधार लागू हों।
Fire Safety Training 2025 : नियमित अभ्यास से आत्मविश्वास बढ़ा
ट्रायल में शामिल कर्मचारियों ने भी माना कि नियमित अभ्यास से उनका आत्मविश्वास बढ़ा है। कई कर्मचारियों ने पहली बार फायर एक्सटिंग्यूशर चलाकर देखा और समझा कि मशीन को किस तरह पकड़ा जाता है और किस दिशा में स्प्रे किया जाता है। अस्पताल में फायर सेफ्टी व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए भविष्य में भी नई मशीनें, धुआं डिटेक्टर और सायरन लगाए जाने की योजना है।
Fire Safety Training 2025 : नियमित अभ्यास से दून मेडिकल कॉलेज
प्रशासन ने उम्मीद जताई कि नियमित अभ्यास से दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल किसी भी आपात स्थिति का सामना करने के लिए तैयार रहेगा और मरीजों की सुरक्षा पहले की तुलना में और बेहतर होगी।


