Eye symptoms : आंख और माथे के दर्द को न करें नजरअंदाज, हो सकता है गंभीर बीमारी का संकेत

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(Eye symptoms) नई दिल्ली: बदलती जीवनशैली, बढ़ते स्क्रीन टाइम और तनाव की वजह से आजकल कई लोगों को आंखों और माथे में दर्द की शिकायत हो रही है। यह दर्द कभी हल्का होता है तो कभी इतना तेज कि रोजमर्रा के काम भी मुश्किल हो जाते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इस समस्या को हल्के में नहीं लेना चाहिए क्योंकि यह किसी गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है।
क्या हैं मुख्य कारण(Eye symptoms)
आरएमएल हॉस्पिटल में मेडिसिन विभाग के डायरेक्टर प्रोफेसर डॉ. सुभाष गिरि के अनुसार, आंखों और माथे में दर्द के कई कारण हो सकते हैं। उन्होंने बताया कि साइनस की समस्या इसका सबसे आम कारण है। साइनस में सूजन या संक्रमण होने पर माथे, नाक की जड़ और आंखों के आसपास भारीपन और दबाव जैसा दर्द महसूस होता है।
डॉ ने बताया कि माइग्रेन भी इस दर्द का एक बड़ा कारण है, जिसमें सिर के एक हिस्से के साथ आंखों में तेज दर्द, मतली, उल्टी और तेज रोशनी से परेशानी हो सकती है। इसके अलावा आंखों की कमजोरी, चश्मे का गलत नंबर या लंबे समय तक स्क्रीन देखने से होने वाला आई स्ट्रेन भी इस दर्द को बढ़ा देता है।
अन्य जोखिम कारक(Eye symptoms)
विशेषज्ञों के मुताबिक, उच्च रक्तचाप, डिहाइड्रेशन और अधिक तनाव के कारण भी आंखों और माथे में लगातार दर्द बना रह सकता है। नींद की कमी होने पर आंखों में जलन, भारीपन और सिरदर्द के साथ यह समस्या और गंभीर हो सकती है।
कब ज्यादा होता है दर्द Eye symptoms
यह दर्द अक्सर लंबे समय तक मोबाइल, लैपटॉप या टीवी देखने के बाद बढ़ जाता है। सुबह के समय साइनस के मरीजों को विशेष रूप से ज्यादा दर्द महसूस हो सकता है। तनाव, अपर्याप्त नींद और तेज धूप में निकलना भी दर्द को बढ़ा सकता है
बच्चों, बुजुर्गों और पहले से माइग्रेन या आंखों की बीमारी से पीड़ित लोगों के लिए यह समस्या ज्यादा खतरनाक हो सकती है। अगर दर्द के साथ धुंधला दिखना, उल्टी, तेज बुखार या आंखों में सूजन हो, तो तुरंत चिकित्सक से परामर्श लेना आवश्यक है।
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बचाव के उपाय(Eye symptoms)
पानी पिएं: रोजाना पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं ताकि शरीर में डिहाइड्रेशन न हो।
स्क्रीन टाइम घटाएं: मोबाइल और लैपटॉप का अत्यधिक उपयोग करने से बचें और बीच-बीच में आंखों को आराम दें।
नियमित जांच: सही नंबर का चश्मा लगाएं और समय-समय पर आंखों की जांच कराएं।
सावधानी बरतें: ठंड, धूल और प्रदूषण से बचाव करें। साइनस की समस्या हो तो विशेष सावधानी रखें।
स्वस्थ जीवनशैली: पूरी नींद लें और तनाव कम करने के लिए योग या मेडिटेशन को अपनी दिनचर्या में शामिल करें।



