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Draupadi Murmu : पशु चिकित्सा में बढ़ती बेटियों की हिस्सेदारी सराहनीय

(Tehelka Desk)Draupadi Murmu : 

राष्ट्रपति ने भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (IVRI), बरेली में दी विद्यार्थियों को सफलता की प्रेरणा

बरेली  राष्ट्रपति Draupadi Murmu ने आज उत्तर प्रदेश के बरेली स्थित भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (IVRI) में आयोजित दीक्षांत समारोह में शिरकत की। अपने प्रेरणादायक संबोधन में उन्होंने कहा कि पशु चिकित्सा के क्षेत्र में महिलाओं, विशेषकर बेटियों की भागीदारी देश के भविष्य के लिए एक शुभ संकेत है।

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राष्ट्रपति का यह दौरा न केवल शैक्षणिक दृष्टि से महत्वपूर्ण था बल्कि इसने महिला सशक्तिकरण, पशुपालन के विकास और स्वास्थ्य सेवा के नवाचारों पर एक नई बहस की शुरुआत भी कर दी है।

महिलाओं की बढ़ती उपस्थिति ने दी नई दिशा

राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा की आज जब मैं यहां उपस्थित छात्राओं की संख्या देखती हूं, तो मुझे गर्व होता है कि बेटियां हर क्षेत्र में आगे आ रही हैं। यह केवल पशु चिकित्सा के लिए नहीं, बल्कि समूचे समाज के लिए एक सकारात्मक परिवर्तन का संकेत है।

उन्होंने कहा कि IVRI जैसे संस्थान, जो वैज्ञानिक अनुसंधान और पशुपालन के क्षेत्र में उत्कृष्टता के लिए प्रसिद्ध हैं, अगर इस दिशा में बेटियों को अवसर दे रहे हैं, तो यह नवाचार और समावेशन की दिशा में बड़ी पहल है।

भारतीय पशुपालन और अर्थव्यवस्था में पशु चिकित्सकों की भूमिका

राष्ट्रपति ने कहा कि भारत की 60% से अधिक ग्रामीण आबादी आज भी कृषि और पशुपालन पर निर्भर है। ऐसे में पशु चिकित्सा का क्षेत्र ग्रामीण भारत की आर्थिक रीढ़ बन सकता है। उन्होंने बताया कि पशुओं का स्वास्थ्य सिर्फ आर्थिक संपन्नता से नहीं जुड़ा, बल्कि जनस्वास्थ्य, दुग्ध उत्पादन, और स्वस्थ आहार श्रृंखला से भी गहराई से जुड़ा हुआ है।

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IVRI का ऐतिहासिक योगदान

भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (IVRI) की स्थापना 1889 में हुई थी और यह भारत में पशु चिकित्सा और पशु विज्ञान के क्षेत्र में सबसे प्रतिष्ठित संस्थानों में से एक है। राष्ट्रपति ने संस्थान के वैज्ञानिकों और विद्यार्थियों की कोविड महामारी के दौरान निभाई गई भूमिका की भी सराहना की।

राष्ट्रपति ने की विद्यार्थियों से संवाद की पहल

अपने संबोधन के दौरान राष्ट्रपति मुर्मू ने विद्यार्थियों से सीधे संवाद किया और उनसे उनके अनुभवों, भविष्य की योजनाओं और समाज में योगदान के बारे में पूछा। उन्होंने कहा कि “डिग्री का असली मूल्य तब है जब उसका उपयोग समाज की भलाई के लिए हो।”

कुशल वैज्ञानिक बनें, मगर संवेदनशील नागरिक भी रहें राष्ट्रपति ने वैज्ञानिकों से आग्रह किया कि वे समाज के प्रति संवेदनशीलता, करुणा, और दायित्व बोध न भूलें। उन्होंने कहा की “ज्ञान का अर्थ केवल जानकारी नहीं, बल्कि उसका सही प्रयोग है।”

पशुपालन को आत्मनिर्भर भारत से जोड़ने की जरूरत

राष्ट्रपति ने कहा कि ‘आत्मनिर्भर भारत’ का सपना तभी साकार होगा जब कृषि और पशुपालन क्षेत्र में वैज्ञानिक नवाचार को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने युवाओं से कहा कि वे पशुपालन के क्षेत्र में स्टार्टअप, बायोटेक्नोलॉजी, और जैव चिकित्सा अनुसंधान पर ध्यान केंद्रित करें।

IVRI को मिली नई दिशा

इस अवसर पर संस्थान के निदेशक ने बताया कि IVRI अब नेशनल हब फॉर जूनेटिक रिसर्च, डिजिटल पशु स्वास्थ्य निगरानी, और AI बेस्ड पशु रोग निदान की दिशा में काम कर रहा है। राष्ट्रपति ने इन प्रयासों की प्रशंसा की।

मुख्य अतिथियों की उपस्थिति

इस मौके पर राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, केंद्रीय मत्स्य एवं पशुपालन मंत्री पुरुषोत्तम रुपाला, यूपी के पशुपालन मंत्री, और कई वरिष्ठ वैज्ञानिक व गणमान्य अतिथि भी उपस्थित रहे।

छात्रों को राष्ट्रपति की सलाह:

  • पशुओं की सेवा को भी राष्ट्रसेवा मानें
  • ग्रामीण क्षेत्रों में काम करने से न हिचकें
  • टेक्नोलॉजी के साथ संवेदनशीलता भी जरूरी है
  • पशुधन के माध्यम से भारत को खाद्य सुरक्षा देना संभव है

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का यह दौरा एक शैक्षिक, सामाजिक और प्रेरणात्मक संदेश लेकर आया। उन्होंने न केवल पशु चिकित्सा के महत्व को रेखांकित किया, बल्कि बेटियों की बढ़ती भागीदारी को राष्ट्रीय गौरव का विषय बताया। यह दौरा देशभर के विद्यार्थियों, विशेषकर बेटियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना।

 

pramesh manori

Asst. News Producer (T)

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