Donald Trump US : मोदी ने मुझे खुश करने के लिए किया, जानते थे मैं नाराज था

(Tehlka Desk) Donald Trump US : अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने भारत द्वारा रूस से तेल आयात में कमी लाने पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। ट्रम्प ने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह कदम उन्हें खुश करने के लिए उठाया है।
ट्रम्प का सीधा बयान :
राष्ट्रपति ट्रम्प ने कहा, “वे मुझे खुश करना चाहते थे। प्रधानमंत्री मोदी बहुत अच्छे व्यक्ति हैं। उन्हें पता था कि मैं इस स्थिति से संतुष्ट नहीं था, इसलिए मुझे प्रसन्न करना आवश्यक था। हम व्यापार करते हैं और उन पर टैरिफ बढ़ा सकते हैं।”
भारतीय राजदूत ने 25% टैरिफ हटाने की अपील की
अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने बताया कि करीब एक महीने पहले वे भारतीय राजदूत विनय मोहन क्वात्रा के घर गए थे। उस बैठक में मुख्य रूप से भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद कम करने पर चर्चा हुई थी।
सीनेटर ग्राहम के अनुसार, भारतीय राजदूत ने उनसे राष्ट्रपति Donald Trump तक यह संदेश पहुंचाने का अनुरोध किया था कि भारत पर लगाया गया अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ हटाया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि भारत अब पहले की तुलना में रूस से काफी कम मात्रा में तेल खरीद रहा है।
तेल आयात में भारी गिरावट
भारत ने 2021 के बाद पहली बार रूस से कच्चे तेल का आयात घटाया है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार:
– नवंबर 2024 में भारत का रूसी तेल आयात लगभग 17.7 लाख बैरल प्रतिदिन था
– दिसंबर में यह घटकर करीब 12 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया
– आने वाले समय में यह 10 लाख बैरल प्रतिदिन से भी नीचे जा सकता है
जनवरी के आंकड़ों में भारत के रूसी तेल आयात में और बड़ी कमी देखने को मिल सकती है।
21 नवंबर से रूस की दो प्रमुख तेल कंपनियों रोसनेफ्ट और लुकोइल पर अमेरिकी प्रतिबंध लागू हो गए हैं। इसके बाद से भारत का रूस से तेल आयात तेजी से घटने लगा है।
यूक्रेन युद्ध के दौरान अमेरिकी अधिकारियों ने आरोप लगाया था कि भारत रूस से तेल खरीदकर यूक्रेन पर हो रहे हमलों को अप्रत्यक्ष रूप से बढ़ावा दे रहा है। इस मुद्दे पर ट्रम्प प्रशासन ने भारत पर 25% टैरिफ भी लगाया था।
यूक्रेन युद्ध के बाद रूस ने 20-25 डॉलर प्रति बैरल सस्ता कच्चा तेल बेचना शुरू किया था। उस समय अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 130 डॉलर प्रति बैरल थी, इसलिए यह छूट भारत के लिए बेहद लाभदायक थी।
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अब स्थिति बदल गई है:
– अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 63 डॉलर प्रति बैरल हो गई है
– रूस ने अपनी छूट घटाकर मात्र 1.5 से 2 डॉलर प्रति बैरल कर दी है
– इतनी कम रियायत में भारत को पहले जैसा फायदा नहीं मिल रहा
– रूस से तेल मंगाने में शिपिंग और बीमा का खर्च भी अधिक आता है
नए विकल्पों की तलाश
इन्हीं कारणों से भारत अब फिर से सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और अमेरिका जैसे स्थिर एवं विश्वसनीय आपूर्तिकर्ताओं से तेल खरीद रहा है। कीमतों में अब पहले जैसा बड़ा अंतर नहीं रहने के कारण भारत के लिए यह व्यावहारिक विकल्प बन गया है।
यूक्रेन युद्ध के बाद भारत रूस का सबसे बड़ा तेल खरीदार बन गया था, लेकिन अब राजनीतिक दबाव और आर्थिक कारणों से यह स्थिति बदल रही है।



