Diwali 2025 : 21 अक्टूबर को नहीं है दिवाली, जानिए क्या है प्रदोष काल और लक्ष्मी पूजा के महत्वपूर्ण संयोग
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(Tehelka Desk)Diwali 2025 :
हिंदू धर्म में Diwali 2025 का त्यौहार अंधकार पर प्रकाश की जीत और धन, सुख एवं समृद्धि की देवी महालक्ष्मी की पूजा का प्रतीक माना जाता है। हर वर्ष दीपावली का समय चंद्र पंचांग और विभिन्न ज्योतिषीय गणनाओं के आधार पर तय होता है। इस बार सोशल मीडिया पर एक चर्चा तेज है कि “क्या 21 अक्टूबर 2025 को दिवाली है?” इस प्रश्न का उत्तर जानने के लिए हमें चंद्रमा की स्थिति और धार्मिक कालों की जानकारी लेना जरूरी है।
विशेषज्ञों के अनुसार, दिवाली का मुख्य दिन अमावस्या (अमावास्यांकी रात) को मनाया जाता है। इस वर्ष, अमावस्या 14 नवंबर 2025 को पड़ रही है, इसलिए 21 अक्टूबर को दिवाली नहीं है। कई लोग इस भ्रम में रहते हैं कि अक्टूबर के तीसरे सप्ताह में दिवाली होती है, लेकिन पंचांग अनुसार यह समय सही नहीं है।
Diwali 2025 : प्रदोष काल क्या है
प्रदोष काल हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण समय माना जाता है। यह समय संध्याकाल यानी सूर्यास्त से लगभग 1.5 घंटे पहले का होता है। प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है। पुराणों में वर्णित है कि इस समय शिव-पार्वती की पूजा करने से जीवन में सुख, समृद्धि और स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है।
धार्मिक विशेषज्ञों के अनुसार, प्रदोष काल का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि यह दिन और रात के संक्रमण का समय है। इस दौरान किए गए उपाय और पूजा अधिक प्रभावकारी माने जाते हैं।
विशेषकर कार्तिक मास में पड़ने वाले प्रदोष का महत्व अधिक है। इस समय लक्ष्मी और धन के देवताओं की भी विशेष आराधना की जाती है।
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Diwali 2025 : जरूरी संयोग
दिवाली पर लक्ष्मी पूजा का मुख्य उद्देश्य घर और कार्यस्थल में धन, सुख और समृद्धि का आगमन सुनिश्चित करना है। विशेषज्ञ बताते हैं कि पूजा करते समय कुछ ज्योतिषीय संयोगों का ध्यान रखना चाहिए:
- स्नान और शुद्धिकरण: पूजा से पहले स्नान करना और घर की साफ-सफाई करना शुभ माना जाता है।
- धन का स्थान: पूजा स्थल पर लक्ष्मी के सामने तांबे या चांदी के सिक्के रखना लाभकारी है।
- प्रदोष काल में पूजा: यदि कोई विशेष पूजा प्रदोष काल में की जाती है, तो यह सुख-समृद्धि बढ़ाने में सहायक मानी जाती है।
- दीपक जलाना: घर के प्रत्येक स्थान में दीपक जलाना और कच्ची मिट्टी के दीपक में तेल डालकर प्रकाश करना शुभ है।
- पूजा सामग्री: लाल, पीले या सुनहरे रंग के वस्त्र, अक्षत, गुलाब जल, कुमकुम, हल्दी और मिठाई का प्रयोग करना शुभ है।
विशेषज्ञों का कहना है कि 21 अक्टूबर को यदि कोई लक्ष्मी पूजा करना चाहे तो इसे प्रदोष काल में करना अधिक फलदायी होगा। इस दिन चंद्रमा की स्थिति, नक्षत्र और योग भी पूजा को असरदार बनाते हैं।
धार्मिक और ज्योतिष विशेषज्ञों के अनुसार, लक्ष्मी पूजन का महत्व केवल धन के लिए नहीं है, बल्कि यह मानसिक शांति, पारिवारिक सुख और आध्यात्मिक प्रगति के लिए भी आवश्यक है। घर में दीपक जलाने और लक्ष्मी मंत्रों का उच्चारण करने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
Diwali 2025 : सावधानियां और उपाय
- पूजा के समय घर और मंदिर का वातावरण शुद्ध रखें।
- मोबाइल या अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का ध्यान रखें, पूजा के दौरान ध्यान भटकने से फायदेमंद प्रभाव कम हो सकता है।
- दीपक जलाते समय आग से बचाव का विशेष ध्यान रखें।
- यदि प्रदोष काल में पूजा नहीं कर पा रहे हैं, तो सुबह या शाम के शुभ समय में भी पूजा लाभकारी मानी जाती है।
सारांश यह है कि 21 अक्टूबर को दिवाली नहीं है, लेकिन यह दिन धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। प्रदोष काल में लक्ष्मी और शिव पूजा करके घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा लायी जा सकती है। यह समय न केवल आध्यात्मिक दृष्टि से लाभकारी है, बल्कि मानसिक शांति और पारिवारिक सौहार्द के लिए भी शुभ माना जाता है।
धार्मिक विशेषज्ञों का कहना है कि त्योहारों का वास्तविक महत्व केवल सामग्री या भौतिक उत्सव में नहीं है, बल्कि आध्यात्मिक चेतना और सकारात्मक विचारों में है। इस वर्ष 21 अक्टूबर को प्रदोष काल का लाभ उठाकर घर में दीपक जलाना, लक्ष्मी मंत्र का उच्चारण और पूजा करना अत्यंत शुभ रहेगा।


