(Tehelka Desk)Delhi politics :
दिल्ली की राजनीति में एक बार फिर ‘आवास खर्च’ को लेकर सियासी पारा चढ़ गया है। इस बार Aam Aadmi Party (AAP) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) आमने-सामने हैं। वजह है दिल्ली की नई मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के सरकारी आवास पर 60 लाख रुपये का खर्च। AAP ने इसे ‘शीशमहल’ कहा तो BJP ने पलटवार करते हुए AAP के नेताओं के सरकारी ठाठ-बाट को ‘मायामहल’ करार दिया। इस पूरे विवाद ने दिल्ली में सियासत को एक बार फिर गरमा दिया है।
क्या है पूरा मामला?
दिल्ली में हाल ही में बनी BJP सरकार के मुख्यमंत्री के तौर पर रेखा गुप्ता ने कार्यभार संभाला है। आरोप है कि मुख्यमंत्री आवास को ‘अल्ट्रा मॉडर्न’ बनाने के लिए सरकार ने 60 लाख रुपये का बजट खर्च किया है। इस बजट में इंटीरियर, नई फर्निशिंग, हाई-टेक सिक्योरिटी सिस्टम और इंटेलिजेंट होम ऑटोमेशन जैसी सुविधाएं जोड़ी गई हैं।
AAP का आरोप है कि रेखा गुप्ता, जो खुद आम आदमी की राजनीति का दावा करती हैं, ने पद संभालते ही जनता के पैसे से ऐशो-आराम के लिए ‘शीशमहल’ बना लिया। पार्टी ने तंज कसा कि जब CM को ही वीवीआईपी जिंदगी जीनी है तो फिर आम आदमी के नाम पर राजनीति क्यों?
AAP का बड़ा हमला ,‘शीशमहल’ की राजनीति
AAP नेता आतिशी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा की “रेखा गुप्ता ने चुनाव से पहले ‘सादगी और पारदर्शिता’ की बात कही थी। लेकिन अब देखिए, पद संभालते ही 60 लाख रुपये अपने आवास को सजाने में उड़ा दिए। ये कैसा बदलाव है? ये कैसा नया भारत है?”
AAP ने दावा किया कि बीजेपी नेता अरविंद केजरीवाल के आधे-अधूरे विकास कार्यों पर सवाल उठाते थे, लेकिन खुद सत्ता में आते ही सरकारी धन से आलीशान बंगला बना रहे हैं। पार्टी ने इसे ‘शीशमहल’ बताते हुए कहा कि रेखा गुप्ता को तुरंत जनता से माफी मांगनी चाहिए।
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BJP का पलटवार , AAP का ‘मायामहल’ भूले क्या?
AAP के आरोपों पर बीजेपी ने तीखा पलटवार किया है। बीजेपी नेता मनीष चौहान ने कहा की“AAP वालों को पहले अपना गिरेबान देखना चाहिए। अरविंद केजरीवाल के सरकारी आवास पर कितने करोड़ों खर्च हुए, किसी को याद नहीं? उनका बंगला तो पूरा मायामहल था। रेखा गुप्ता ने तो सिर्फ बेसिक सिक्योरिटी और जरूरी इंटीरियर के लिए पैसा खर्च किया है।”
BJP ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री आवास पर खर्च जनता की सुरक्षा और सुविधा को देखते हुए किया गया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि AAP इस मुद्दे को बेवजह तूल देकर जनता को गुमराह कर रही है।
कितना खर्च और किस मद में?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सरकारी दस्तावेजों में CM रेखा गुप्ता के आवास पर करीब 60 लाख रुपये का खर्च इंटीरियर डिज़ाइन, CCTV कैमरे, सुरक्षा दरवाजे, स्मार्ट लाइटिंग सिस्टम और अन्य इंटेलिजेंट डिवाइसेज़ पर हुआ है। दिल्ली सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक यह खर्च ‘अनिवार्य आवासीय मरम्मत और सिक्योरिटी अपग्रेडेशन’ मद में शामिल है।
क्या कहते हैं जानकार?
राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि दिल्ली में मुख्यमंत्री आवास हमेशा से राजनीतिक निशाना रहा है। इससे पहले भी अरविंद केजरीवाल के आलीशान बंगले को लेकर BJP लगातार हमलावर रही है। अब जैसे ही दिल्ली में सत्ता बदली, तो आवास खर्च पर AAP ने पलटवार कर पुराना मुद्दा फिर से ताजा कर दिया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि आवास और सरकारी सुविधाओं को लेकर राजनीतिक दल अक्सर ‘जनता के पैसे’ का हवाला देकर एक-दूसरे पर आरोप लगाते हैं, लेकिन सत्ता में आते ही वही सुविधाएं खुद लेते हैं।
जनता का क्या कहना है?
दिल्ली की जनता भी सोशल मीडिया पर इस मुद्दे पर खूब प्रतिक्रिया दे रही है। ट्विटर से लेकर फेसबुक तक ‘शीशमहल Vs मायामहल’ ट्रेंड कर रहा है। लोग सवाल पूछ रहे हैं कि जो भी पार्टी सत्ता में आती है, वो आखिरकार सरकारी पैसे से ही आरामतलब क्यों बन जाती है? कुछ लोग यह भी कह रहे हैं कि चाहे AAP हो या BJP, दोनों ही आम आदमी की बात करते हैं लेकिन कुर्सी पर बैठते ही सब बदल जाता है।
AAP की रणनीति , जनता के बीच मुद्दा गरमाना
AAP ने संकेत दिया है कि पार्टी इस मुद्दे को विधानसभा से लेकर सड़क तक उठाएगी। पार्टी के नेता लगातार प्रेस कॉन्फ्रेंस कर BJP सरकार को कटघरे में खड़ा करने की कोशिश कर रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक पार्टी इसे 2025 के MCD चुनाव में भी बड़ा मुद्दा बना सकती है।
BJP का दावा , जनता सब जानती है
बीजेपी ने भी पलटवार के लिए पूरी तैयारी कर ली है। पार्टी नेताओं का कहना है कि अब जनता को पता चल गया है कि AAP की ‘साफ सुथरी’ छवि सिर्फ दिखावा है। बीजेपी इसे दिल्ली में अपनी मजबूत पकड़ बनाए रखने का मौका मान रही है।
अब आगे क्या?
सूत्रों के मुताबिक दिल्ली विधानसभा के आगामी सत्र में विपक्ष इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाएगा। संभावना है कि AAP विधायक प्रश्नकाल में इस खर्च पर मुख्यमंत्री से जवाब मांग सकते हैं। दूसरी तरफ BJP सरकार ने साफ संकेत दिए हैं कि वो इस मुद्दे पर झुकने वाली नहीं है।
दिल्ली में सत्ता बदलने के बाद भी ‘मुख्यमंत्री आवास विवाद’ की कहानी बदलती नहीं दिख रही है। पहले ‘मायामहल’ तो अब ‘शीशमहल’, राजनीति वहीं खड़ी है। सवाल बड़ा है कि आखिर कब तक जनता के टैक्स के पैसे पर ऐसी राजनीतिक रस्साकशी चलती रहेगी? और क्या कभी कोई सरकार सादगी से रहकर उदाहरण पेश करेगी? शायद आने वाला वक्त ही बताएगा!


