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Chhath Puja 2025 : उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ संपन्न हुआ छठ महापर्व, दिल्ली-मुंबई से पटना तक दिखी श्रद्धा और रौनक

(Tehelka Desk)Chhath Puja 2025 : 

देशभर में लोक आस्था के महापर्व Chhath Puja 2025  का समापन आज उगते सूर्य को अर्घ्य देकर हुआ। चार दिनों तक चलने वाले इस पर्व में पूरे देश में श्रद्धा, भक्ति और उल्लास का अद्भुत संगम देखने को मिला। बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश से लेकर दिल्ली, मुंबई और कोलकाता तक घाटों पर हजारों की भीड़ उमड़ी। महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में सज-धजकर सुबह-सवेरे घाटों पर पहुंचीं और सूर्यदेव को अर्घ्य अर्पित किया।

Chhath Puja 2025 :  देशभर में छठ की गूंज

छठ पर्व की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें आडंबर नहीं, बल्कि सादगी और आत्मसंयम की परंपरा है। नदियों, तालाबों और कृत्रिम जलाशयों के किनारे छठ घाटों को सजाया गया था। लोग परिवार सहित पहुंचे और सूर्यदेव से परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।
दिल्ली के यमुना घाट, मुंबई के जुहू बीच, पटना के गंगा घाट और वाराणसी के अस्सी घाट पर श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा।

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Chhath Puja 2025 :  चार दिन का पर्व और तपस्या

छठ महापर्व चार दिनों तक चलता है  नहाय-खाय, खरना, संध्या अर्घ्य और उषा अर्घ्य
पहले दिन नहाय-खाय में घर की महिलाएं पवित्रता के साथ भोजन तैयार करती हैं। दूसरे दिन खरना पर व्रती महिलाएं पूरे दिन उपवास रखकर शाम को गुड़-चावल की खीर बनाती हैं और उसे प्रसाद के रूप में ग्रहण करती हैं।
तीसरे दिन संध्या अर्घ्य के समय सूर्यदेव को डूबते सूर्य की पूजा अर्पित की जाती है।
और चौथे दिन  यानी आज  उगते सूर्य को अर्घ्य देकर यह व्रत समाप्त होता है। यह क्षण सबसे पवित्र माना जाता है, जब व्रती महिलाएं जल में खड़ी होकर सूर्यदेव को अर्घ्य देती हैं और परिवार की खुशहाली की कामना करती हैं।

Chhath Puja 2025 :  श्रद्धा और त्याग का पर्व

छठ पूजा महिलाओं की असीम श्रद्धा और आत्मसंयम का प्रतीक है। इस व्रत में पानी तक नहीं पिया जाता और लगातार दो दिन उपवास रखा जाता है। महिलाएं पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ इस कठिन तपस्या को निभाती हैं। इस दौरान वातावरण में भक्ति गीतों की गूंज रहती है केतना दिनवा के भइलीं हम दुलरुआ, उग हे सूरज देव…” जैसे गीत माहौल को भावनात्मक बना देते हैं।

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Chhath Puja 2025 :  पूर्वांचल में भव्य दृश्य

बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश में छठ पूजा का नजारा हर साल की तरह इस बार भी भव्य रहा। पटना, गया, भागलपुर, मुजफ्फरपुर, और दरभंगा में गंगा किनारे बनाए गए घाटों पर लाखों श्रद्धालु पहुंचे।
सरकार की ओर से सुरक्षा और स्वच्छता के कड़े इंतज़ाम किए गए थे। स्थानीय प्रशासन ने नदी किनारे रौशनी, बैरिकेडिंग और स्वास्थ्य सुविधाओं का भी विशेष ध्यान रखा।
मुख्यमंत्री और राज्यपाल ने भी श्रद्धालुओं को शुभकामनाएँ दीं।

Chhath Puja 2025 :  महानगरों में भी गूंजा पर्व

दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और सूरत जैसे शहरों में भी बिहार और पूर्वांचल से आए प्रवासी लोगों ने पूरे उत्साह से छठ मनाया। यमुना के तट पर सुबह-सुबह हजारों लोग पारंपरिक गीतों के साथ पूजा में शामिल हुए।
मुंबई में जुहू बीच पर छठ घाट बनाया गया था जहाँ लोगों ने सूर्यदेव को अर्घ्य अर्पित किया। दिल्ली सरकार और बीएमसी ने साफ-सफाई और सुरक्षा के लिए विशेष टीम तैनात की थी।

Chhath Puja 2025 :   भक्ति और संस्कृति का संगम

छठ सिर्फ धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति की आत्मा है। इसमें पर्यावरण, शुद्धता और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का भाव निहित है। व्रती महिलाएं मिट्टी के घड़े, बाँस की टोकरी और फल-फूल से पूजा करती हैं  यह दिखाता है कि यह पर्व पूरी तरह प्रकृति-संगत है।
लोकगीतों और पारंपरिक धुनों से सजे घाटों पर लोगों ने परिवार सहित सामूहिक रूप से पूजा की। कहीं बच्चों ने सूरज भगवान की आरती उतारी, तो कहीं बुजुर्गों ने अगली पीढ़ी को इस परंपरा का महत्व समझाया।

Chhath Puja 2025 :  स्वच्छता के पुख्ता इंतज़ाम

पर्व के दौरान प्रशासन की ओर से सुरक्षा और व्यवस्था पर खास नजर रखी गई। पुलिस बल, एनडीआरएफ और स्वास्थ्यकर्मी घाटों पर तैनात रहे। महिलाओं और बुजुर्गों की सुविधा के लिए हेल्प डेस्क भी बनाए गए।
नगर निगम की टीमें सफाई और रोशनी की व्यवस्था में लगी रहीं।

Chhath Puja 2025 :  सामूहिकता का प्रतीक

छठ पर्व ने एक बार फिर दिखाया कि भारतीय समाज में परंपरा और संस्कृति कितनी गहराई से जुड़ी है। चाहे कोई कहीं भी रहे, छठ पर्व के समय हर व्यक्ति अपने मूल और मिट्टी से जुड़ जाता है। यह पर्व लोगों के बीच एकता, सहयोग और भक्ति का भाव जगाता है।

Chhath Puja 2025 :  भक्ति में डूबा भारत

सुबह की लालिमा के साथ जब उगते सूर्य की पहली किरण पानी पर पड़ी, तो घाटों पर जयकारों की गूंज उठी। महिलाएं, बच्चे और पुरुष एक साथ सूर्यदेव की आराधना में लीन थे।
यह नज़ारा न केवल धार्मिक भावना को प्रकट करता है, बल्कि जीवन के प्रति कृतज्ञता और सकारात्मकता का प्रतीक भी है।

उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ आज छठ महापर्व का समापन हुआ। यह पर्व न केवल एक धार्मिक अनुष्ठान है बल्कि भारत की संस्कृति, एकता और आस्था की जीवंत मिसाल भी है। पटना से दिल्ली और मुंबई तक, हर जगह यही संदेश गूंजा  “छठ मइया सब पर कृपा करें।”

 

Seema Gariya

Asst. News Producer (T)

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