Chamoli Rain Tragedy: बदरीनाथ हाईवे पर मलबा गिरने से हड़कंप, रेड अलर्ट जारी
Headings
- 1 Amit Shah Slams Rahul: साधा निशाना, Operation Sindoor के 52 दिन बाद भी उठा रहे सवाल
- 1.0.1 Chamoli Rain Tragedy: श्रद्धालु और स्थानीय लोग फंसे
- 1.0.2 Chamoli Rain Tragedy: पशुधन और खेती को भी भारी नुकसान
- 1.0.3 Chamoli Rain Tragedy: प्रशासनिक मुस्तैदी, सीएम धामी की निगरानी
- 1.0.4 Chamoli Rain Tragedy: घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल
- 1.0.5 Chamoli Rain Tragedy: स्थानीय लोगों की मांग, स्थायी समाधान चाहिए
(Tehelka Desk)Chamoli Rain Tragedy:
भारी बारिश का कहर, उत्तराखंड के चमोली में तबाही
उत्तराखंड में मानसून की पहली ही बारिश ने चमोली जिले में तबाही मचा दी है। Badrinath हाईवे पर कई जगहों पर पहाड़ी से भारी मलबा गिरा, जिससे यातायात पूरी तरह बाधित हो गया। इस घटना में कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन कई लोग बाल-बाल बचे हैं। प्रशासन ने रेड अलर्ट जारी किया है और चारधाम यात्रा अस्थायी रूप से रोक दी गई है।
Chamoli Rain Tragedy: बदरीनाथ हाईवे पर भारी मलबा, आवाजाही पूरी तरह बंद
चमोली जिले के पार्थाडीस और पीपलकोटी क्षेत्र के बीच स्थित बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर अचानक पहाड़ी से मलबा गिर गया। घटनास्थल पर पहले से चल रही बारिश के कारण हाईवे के दोनों ओर कई वाहन फंस गए हैं।
कहां-कहां बाधित है यातायात?
- पार्थाडीप के पास मलबा गिरने से सड़क अवरुद्ध
- पीपलकोटी से आगे यात्रियों को रोक दिया गया
- प्रशासन ने अस्थायी शेल्टर होम में यात्रियों की व्यवस्था की
स्थानीय लोगों ने बताया कि जमीन कंपन के साथ ही पत्थर और कीचड़ तेजी से नीचे गिरा, जिससे वहां मौजूद लोग डर के मारे इधर-उधर भागने लगे। गनीमत यह रही कि कोई जानमाल का नुकसान नहीं हुआ।
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Chamoli Rain Tragedy: श्रद्धालु और स्थानीय लोग फंसे
इस मार्ग पर चल रही बदरीनाथ यात्रा और अन्य धार्मिक गतिविधियों के चलते हजारों श्रद्धालु यात्रा कर रहे थे। मलबा गिरने के कारण उन्हें रास्ते में ही रोका गया है। प्रशासन ने यात्रियों को नजदीकी धर्मशालाओं, स्कूलों और पंचायत भवनों में ठहराया है।
राहत और बचाव:
- फंसे यात्रियों को भोजन और पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है
- एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीम राहत कार्य में जुटी
- डॉक्टरों की टीम भी घटनास्थल पर मौजूद है
रेड अलर्ट जारी, चार दिन और रहेगा खतरा
मौसम विभाग (IMD) ने उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में अगले चार दिनों तक भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की है।
कहां-कहां अलर्ट?
- चमोली, रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़, बागेश्वर और उत्तरकाशी में
- बारिश के साथ तेज हवाएं (40-60 किमी प्रति घंटा) चलने की संभावना
- भूस्खलन, पेड़ गिरना और जलभराव की चेतावनी
राज्य आपदा प्रबंधन केंद्र ने सभी जिलाधिकारियों को सतर्क रहने और कमजोर इलाकों में विशेष निगरानी के निर्देश दिए हैं।
Chamoli Rain Tragedy: पशुधन और खेती को भी भारी नुकसान
पार्थाडीस गांव के पास कई खेतों में मिट्टी और पत्थर जम गए, जिससे फसलें पूरी तरह बर्बाद हो गईं। साथ ही, कुछ पशुओं की मौत की भी खबर है।
नुकसान का ब्यौरा:
- 3 गौशालाएं ढहीं, जिनमें बैल और बकरियां मलबे में दबीं
- 10 से ज्यादा खेतों में मलबा घुसा
- 4 ग्रामीण परिवारों को घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया
Chamoli Rain Tragedy: प्रशासनिक मुस्तैदी, सीएम धामी की निगरानी
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने चमोली जिला प्रशासन से तात्कालिक रिपोर्ट मांगी है और राहत-बचाव कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं।
सीएम के निर्देश:
- हर प्रभावित क्षेत्र में सहायता शिविर स्थापित किए जाएं
- स्थानीय एसडीएम और तहसीलदार को तत्काल मौके पर भेजा जाए
- मलबा हटाने के लिए PWD और BRO को लगाया गया
धामी ने यह भी कहा कि जो यात्री फंसे हैं, उनके लिए भोजन, पानी और मेडिकल सुविधा की कोई कमी नहीं होनी चाहिए।
Chamoli Rain Tragedy: घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल
स्थानीय लोगों द्वारा बनाई गई वीडियो क्लिप्स में साफ देखा जा सकता है कि कैसे कुछ ही सेकंड में भारी मात्रा में मलबा गिरा और सड़क पूरी तरह से बंद हो गई।
वायरल वीडियो में:
- पहाड़ी से पत्थर गिरने की आवाजें
- दौड़ते हुए लोग और गाड़ियों का रुक जाना
- ग्रामीणों की घबराहट और प्रशासन की तत्परता
Chamoli Rain Tragedy: स्थानीय लोगों की मांग, स्थायी समाधान चाहिए
चमोली क्षेत्र में हर साल मानसून में ऐसी घटनाएं आम होती जा रही हैं। स्थानीय लोगों ने सरकार से मांग की है कि:
- पहाड़ी क्षेत्रों में स्लोप स्टेबिलाइजेशन किया जाए
- हाईवे के किनारों पर प्राकृतिक सुरक्षा दीवारें बनाई जाएं
- हर 10 किमी पर इमरजेंसी कंट्रोल सेंटर बने
सावधानी ही सुरक्षा है
उत्तराखंड में भारी बारिश और भूस्खलन नई बात नहीं, लेकिन बदरीनाथ हाईवे जैसा महत्वपूर्ण मार्ग बार-बार बंद होना चिंता की बात है। शासन और प्रशासन तत्पर है, पर स्थायी समाधान ज़रूरी है। लोगों से अपील है कि मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करें और बिना ज़रूरत पहाड़ी क्षेत्रों की यात्रा फिलहाल टालें।


