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BMC Election : BMC चुनाव में बड़ा धमाका, उद्धव–राज ठाकरे साथ आए

(Tehelka Desk)BMC Election : 

मुंबई की सियासत में एक बार फिर बड़ा भूचाल आ गया है। लंबे समय बाद ठाकरे परिवार की दो प्रमुख राजनीतिक धाराएं—Uddhav Thackeray की शिवसेना (UBT) और राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS)—बीएमसी चुनाव को लेकर एक मंच पर आती नजर आ रही हैं। दोनों नेताओं ने साफ शब्दों में ऐलान किया है कि वे बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) का चुनाव मिलकर लड़ेंगे और अगला मुंबई का मेयर उनका होगा। इस घोषणा के साथ ही महाराष्ट्र की राजनीति में नई सियासी ध्रुवीकरण की शुरुआत मानी जा रही है।

BMC Election :  BMC चुनाव क्यों है इतना अहम?

बीएमसी न केवल देश की सबसे अमीर नगर निगम है, बल्कि मुंबई की राजनीति और प्रशासन पर इसका सीधा प्रभाव पड़ता है। करीब 75 हजार करोड़ रुपये से अधिक का बजट रखने वाली बीएमसी पर नियंत्रण राजनीतिक दलों के लिए प्रतिष्ठा का सवाल रहा है। पिछले करीब 25 वर्षों तक इस पर शिवसेना का कब्जा रहा, लेकिन हाल के राजनीतिक घटनाक्रमों के बाद यह चुनाव और भी ज्यादा अहम हो गया है।

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BMC Election :  ठाकरे बनाम ठाकरे की सियासत अब साथ-साथ

उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के बीच लंबे समय से राजनीतिक मतभेद रहे हैं। 2006 में शिवसेना से अलग होकर राज ठाकरे ने MNS का गठन किया था। इसके बाद दोनों दलों ने कई चुनावों में एक-दूसरे के खिलाफ मोर्चा खोला। लेकिन बदले राजनीतिक हालात और बीएमसी चुनाव की अहमियत को देखते हुए दोनों नेताओं ने अपने मतभेद भुलाकर मराठी अस्मिता और मुंबई हित के नाम पर साथ आने का फैसला किया है।

एक संयुक्त बयान में उद्धव ठाकरे ने कहा,
“मुंबई किसी एक पार्टी की नहीं, मुंबई महाराष्ट्र की शान है। इसे बचाने के लिए हम साथ आए हैं।”

वहीं राज ठाकरे ने कहा,
“मुंबई का मेयर मराठी मानुष का ही होगा। बीएमसी पर फिर से ठाकरे ब्रांड लौटेगा।”

BMC Election :  बीजेपी और शिंदे गुट पर सीधा हमला

इस गठबंधन का सीधा असर बीजेपी और एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना पर पड़ता नजर आ रहा है। उद्धव और राज दोनों ने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार ने मुंबई के हितों की अनदेखी की है और बीएमसी को राजनीतिक मोहरे की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है।
राज ठाकरे ने खास तौर पर कहा कि “मुंबई को कॉर्पोरेट और बाहरी ताकतों के हाथों गिरवी रखने की कोशिश हो रही है, जिसे मराठी जनता कभी बर्दाश्त नहीं करेगी।”

BMC Election :  मराठी वोट बैंक को साधने की रणनीति

राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, उद्धव-राज की जोड़ी का सबसे बड़ा लक्ष्य मराठी वोट बैंक को एकजुट करना है। पिछले कुछ चुनावों में यह वोट बैंक बंटा हुआ नजर आया, जिसका फायदा बीजेपी और अन्य दलों को मिला।
अब दोनों ठाकरे एक साथ आकर मराठी अस्मिता, स्थानीय रोजगार, मुंबई की जमीन और संस्कृति जैसे मुद्दों को चुनावी एजेंडा बनाने जा रहे हैं।

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BMC Election :  मेयर पद को लेकर स्पष्ट दावा

दोनों नेताओं ने यह भी साफ कर दिया है कि अगर गठबंधन को बहुमत मिलता है तो मेयर पद पर ठाकरे गुट का ही उम्मीदवार होगा। हालांकि, यह अभी तय नहीं किया गया है कि उम्मीदवार उद्धव गुट से होगा या राज ठाकरे की MNS से, लेकिन संकेत साफ हैं कि सत्ता साझा करने का फॉर्मूला आपसी सहमति से तय होगा।

BMC Election :  कार्यकर्ताओं में दिखा उत्साह

घोषणा के बाद शिवसेना (UBT) और MNS के कार्यकर्ताओं में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। मुंबई के कई इलाकों में पोस्टर लगाए गए, जिन पर लिखा था—
“एक साथ ठाकरे, मुंबई फिर हमारे साथ”।
सोशल मीडिया पर भी यह खबर ट्रेंड करने लगी और समर्थकों ने इसे मराठी राजनीति का ऐतिहासिक पल बताया।

BMC Election :  चुनावी समीकरण कैसे बदलेंगे?

बीएमसी चुनाव में कुल 227 वार्ड होते हैं और बहुमत के लिए 114 सीटों की जरूरत होती है। उद्धव-राज की एकजुटता से विपक्षी खेमे में हलचल तेज हो गई है। बीजेपी और शिंदे गुट के लिए यह गठबंधन सीधी चुनौती माना जा रहा है, क्योंकि मराठी वोटों के एकजुट होने से उनका गणित बिगड़ सकता है।

BMC Election :  आगे की जानकारी

सूत्रों के मुताबिक, जल्द ही दोनों दल संयुक्त चुनावी समिति, सीट शेयरिंग फॉर्मूला और कॉमन मिनिमम प्रोग्राम की घोषणा कर सकते हैं। आने वाले दिनों में उद्धव और राज ठाकरे की साझा रैलियां और रोड शो भी देखने को मिल सकते हैं।

उद्धव और राज ठाकरे का साथ आना सिर्फ एक चुनावी गठबंधन नहीं, बल्कि मुंबई की राजनीति में एक नई दिशा और नई चुनौती का संकेत है। अब देखना यह होगा कि यह एकता वोटों में कितनी तब्दील होती है और क्या वाकई बीएमसी में एक बार फिर ठाकरे नाम की वापसी होती है।

 

Seema Gariya

Asst. News Producer (T)

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